रायपुर | रमेश कुमार "रिपु " | बस्तर का दंतेवाड़ा और सुकमा जिला को पुलिस ने इनामी नक्सलियों का केन्द्र बना दिया है। जबकि दंतेवाड़ा की डेढ़ सौ पंचायतों में केवल बीस पंचायतें ही रेड जोन में है। भरमार बंदूक के साथ सरेंडर करने वाले नक्सली को भी पुलिस लाखों का इनामी बना देती है। नक्सली सभी वर्दी में होते में हैं। लेकिन दंतेवाडा में पांच सौ नक्सलियों के सरेंडर का लक्ष्य पूरा करने बनियान पहने ग्रामीणों को भी पुलिस नक्सली बता रही है।
भूपेश सरकार ने नक्सलियों के आगे घुटने टेक दी है। नक्सलवाद पर इस सरकार ने राजनीति की है। जिसके दुष्परिणाम हम सभी को आने वाले समय मे भुगतने होंगे। राज्य सभा सदस्य सरोज पांडे के इस बयान के बाद देखा जा रहा है कि सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपने घुटने सीधे क्या किये, बस्तर पुलिस ने दंतेवाड़ा जिला को इनामी नक्सलियों का ठिकाना बना दिया। इस जिले में डेढ़ सौ पंचायतें हैं। जिसमें केवल बीस पंचायतें ही रेड जोन में हैं। करीब 30 पंचायतें ग्रे एरिया कहलाती हैं। जहां सुरक्षाबल और माओवादी, दोनों ग्रामीणों के सम्पर्क में रहते हैं। बची हुई 100 पंचायतें ग्रीन क्षेत्र हैं, जहां राज्य पुलिस और प्रशासन का पूर्ण अधिकार है। लेकिन देखा जा रहा है कि बस्तर पुलिस ने इनामी नक्सलियों के सरेंडर की झड़ी लगा दी है। दंतेवाड़ा पुलिस को साल के अंत तक पांँच सौ नक्सलियों के सरेंडर का लक्ष्य दिया गया है। दंतेवाड़ा एस.पी अभिषेक पल्लव कहते हैं, हमने 1600 ग्रामीणों के नक्सली बनने की पहचान कर ली है। इनमें करीब 200 सशस्त्र लड़ाके हैं। नक्सली बनने ग्रामीणों को लोन वर्राटू के जरिये सरेंडर करने की मुहिम को अंजाम दिया जा रहा है। लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 56 ईनामी 208 नक्सलियों ने सरेंडर किया है।’’
16 सितम्बर 2020 को वामपंथी उग्रवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए बस्तर पुलिस ने पोस्टर लघु फिल्मों,आॅडियो क्लिप और स्थानीय अखबारों के माध्यम से नक्सलियों के आदिवासी और विकास विरोधी गतिविधियों पर नकेल लगाने और उनकी काली करतूतों से ग्रामीणों को रूबरू कराने एक अभियान शुरू किया। गोंडी, हल्बी और अन्य स्थानीय जनजातीय बोलियों में पोस्टर, बैनर के साथ,साथ ऑडियो और वीडियो क्लिप का सहारा लिया। जाहिर सी बात है कि लक्ष्य की पूर्ति के लिए पुलिस ग्रामीण आदिवासियों को नक्सली बताकर सरेंडर करायेगी और अपनी पीठ थपथपायेगी। सच तो यह है कि नक्सलवाद के खात्मे कि झूठी कहानियाँ गढ़ती आई है बस्तर पुलिस। @रमेश कुमार "रिपु"