September 18, 2021

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प्रभु की लीला: ७.५ किलो की मूर्ति पानी मैं तैरती रही डूबी नहीं




भोपाल | न्यूज़ डेस्क | डोल ग्यारस के अवसर पर मध्यप्रदेश के देवास जिले के हाटपिपलिया में हजारों लोगों के सामने 7.50 किलो वजन वाली भगवान नृसिंह की पत्थर की प्रतिमा को बहती नदी में छोड़ा गया लेकिन प्रतिमा पानी में नहीं डूबी। सतह पर तैरती रही। पुजारी ने एक बार नहीं बल्कि 3 बार प्रतिमा को पानी में छोड़ा लेकिन हर बार पत्थर की मूर्ति नदी की सतह पर तैरती रही।

दरअसल, यह सदियों पुरानी परंपरा है। हर वर्ष डोल ग्यारस के अवसर पर नरसिंह मंदिर से डोल निकाले जाते हैं जो नदी के घाट तक पहुंचते हैं। यहां पुजारी द्वारा है स्नान करने के बाद भगवान नरसिंह की प्रतिमा को नदी में प्रवाहित किया जाता है। ऐसा लगातार तीन बार किया जाता है।

प्रतिमा पत्थर की बनी हुई है और उसका वजन 7.5 किलो है। प्रतिमा के पानी में डूबने अथवा सतह पर तैरने के आधार पर आने वाले साल की भविष्यवाणी की जाती है। इस साल तीनों बार प्रतिमा नदी की सतह पर तैरती रही। इस दौरान नदी के किनारों पर लगभग 10,000 नागरिक उपस्थित थे।

2005 में एक बार तैरी थी प्रतिमा
वर्ष 2011, 12 में प्रतिमा दो बार तैरी थी। वर्ष 2016, 17 व 18 में भी प्रतिमा तीन बार तैरी थी। इसके पूर्व वर्ष 2005 में प्रतिमा एक ही बार तैरी थी। कोरोना काल में भी सिर्फ इस परंपरा को निभाया गया था।

इस बार प्रतिमा तैराने वाले राहुल वैष्णव ने बताया तैराने वाला पहले सवा महीने की साधना करता है। इस सवा महीने भर वह मंदिर में ही रहकर पूजा-अर्चना कर भक्ति करता है। सवा महीने बाहरी चीजों का त्याग करता है। ऐसी मान्यता है कि यदि प्रतिमा तीन बार तैरी तो पूरा वर्ष अच्छा निकलेगा।




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सोनम कौर भाटिया

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