September 10, 2021

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गणेश चतुर्थी विशेष : जानें शुभ मुहूर्त , पूजा की विधि , क्या करें अर्पित और गणेश मन्त्र




मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को विद्या, बुद्धि देवता, विघ्न हर्ता, मंगलकारी, रक्षा कारक, सिद्धि दायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी पर्व का विशेष महत्व है। 10 दिनों तक चलने वाले विशेष पर्व के दौरान बप्पा अपने भक्तों के घरों में विराजते हैं। गणेशोत्सव भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ इस विशेष पर्व का समापन होता है।

शुभ मुहूर्त
गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त :11:02:58 से 13:32:52 तक अति शुभ
चन्द्र दर्शन वर्जित 09:12 मिनट से से रात्रि 8:53 तक। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर पौराणिक मत है जिसके अनुसार इस चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। इस वजह से ही चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को निषेध माना गया।

पूजा विधि व भोग
ब्रह्म मुहूर्त में जागना चाहिए व नित्य कर्म निवृत्त होकर स्नानादि करने के उपरांत लाल वस्त्र धारण करें। मंदिर को गंगाजल से पवित्र कीजिए। भगवान गणपति का स्मरण करें। कलश में जल भरें और इसमें सुपारी डालकर कलश को कपड़े से बांध दें।

इसके बाद एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछा दें।
स्थापना करने से पहले भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं। फिर गंगा जल से भगवान गणेश की मूर्ति को स्नान कराकर चौकी पर स्थापित करें। भगवान गणेश के साथ चौकी पर दो सुपारी (रिद्धि और सिद्धि माता के रूप में) स्थापित करें।
स्थापना के बाद अखंड ज्योति जलाएं।

भगवान गणेश को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। फल, फूल, आदि अर्पित करें और फूल से जल अर्पित करें। और गजानन महाराज को चांदी के वर्क लगायें। उसके उपरांत पूजा में लाल रंग के फूल, जनेऊ, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, और भोग अर्पित करें। गणेश जी को 108 दूर्वा अर्पित करें। 21 मोदक का भोग लगाएं, लड्डू चड़ाए। घी के दीपक से आरती करें। भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें।

1- ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।
2- गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:।।
3- ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।।
4- ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।।
( दायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्राप्त होता है।)
आप सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।




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