श्रीगंगा नगर | न्यूज़ डेस्क | मुगलकाल से ही जब भी अकाल तख्त साहिब की प्रभुसत्ता उसकी शौहरत हुई।दिल्ली तख्त ईर्ष्यालु बन अपनी चालें चलता रहा। गुरुघर की उपमा बढ़ने लगी ।हाकिम टुकड़बोचों और गद्दारों को ढूंढने लगा।नतीजा गुरुघर का ही प्रिथीया ईर्ष्यावश मुगल हाकम जहांगीर से मिल गया।दरबार साहिब के समकक्ष एक और दरबार साहिब उसारने के लिए दो गांवों की जागीर दी ।धन दौलत दी ताकि नया दरबार साहिब तैयार कर उन लोगों को गुमराह किया जाए जो दरबार साहिब जाकर सच और सिद्धांत की बात कर रहे है।ताकि लोग झूठ की दुकान में आकर ग़ैरसिद्धान्तक हो जाये।और फिर सिद्धांत से गिरे को मारना कोई मुश्किल नही वो मरे समान ही होता है।
उक्त बातों का प्रगटावा श्री अकाल तख्त साहिब जी के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह जी ने आज साहिब श्री गुरुतेग बहादुर साहिब जी के 400 साला शताब्दी समारोह के सबन्ध में गंगा नगर-हनुमानगढ़ की समूह जत्थेबंदियों की मीटिंग में किया।मीटिंग का आयोजन गुरद्वारा भाई सुक्खा सिंह भाई महताब सिंह मंडी गोलूवाला में हुआ।
11 जी विवाद पर बोलते जत्थेदार साहिब ने कहा कि शासकों के चेहरे मोहरे बदल गए पृथिये के रूप भी बदल गए पर सोच आज भी वही घ्रणित है।चंद टुकड़ों के बदले कुछ लोग पंथ से दगा कमाते है पर उनकी आने वाली पुश्तें भी उस पाप का अंजाम भोगती है।यही एक अटल सच्चाई है।
सिंह साहिब ने कहा कि अकाल तख्त के आगे झुक कर कोई छोटा नही होता पर ये भी सच है कि टकराने वाले का हश्र बहुत बुरा होता है।उन्होंने समूची सिख संगत से 400 साला शताब्दी समारोह के लिए सारी संगत से अभी ही जुट जाने की अपील की।और आश्वस्त किया कि इस के लिए जो भी सहयोग होगा शिरोमणि गुरद्वारा प्रबन्धक कमेटी व तख्त साहिब हमेशा ही आपके साथ है----सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन राजस्थान।