रायपुर | रमेश कुमार "रिपु" | बिहार में किसकी हार होगी,यह सवाल राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन बिहार की जनता तेजस्वी का जिस तरह साथ दिया वह, मोदी के लिए 440 वाट के झटके की तरह है। तेजस्वी को जंगल राज का युवराज कह कर ताली बजवा लेना, कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि एक 31 साल के लड़के के प्रति बिहार की जनता ने जो प्यार और स्नेह दिखाया,वह सभी राजनीतिक दलों को भौचक्क कर दिया।
वक्त अब बदल गया है। यदि नीतीश की सरकार बन भी जाती है तो,बिहार के उन मजदूरों का दर्द कम नहीं हो जाएगा,जिन्होने तपती सड़कों पर नंगे पैर चले हैं। भूखे अपने घर पहुंँचे हैं। बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर या फिर साइकिल से परीक्षा केन्द्र पहुंँचे हैं। दो करोड़ नौकरी हर बरस देने का वायदा करके केन्द्र में आने वाले मोदी ने ,हर बरस दो करोड़ नौकरी खत्म कर दिये। मोदी मैजिक का नतीजा यह निकला कि, देश की जीडीपी इतनी गिरी,जितनी भ्रष्ट नेता का चरित्र गिरता है। महंगाई मोदी से भी ऊंची हो गई। मोदी को लेकर जितने भी सपने देखे गये वो मुमकिन तो नहीं हुए। अलबत्ता देश ने बातों का जलपान खूब किया। मोदी 2022 तक कौन सा चमत्कार दिखाते हैं,देश भी इंतजार में है।
बहरहाल तेजस्वी यादव राजनीति का बाजीगर बनकर उभरे हैं। उनके नेतृत्व में राजद ने वापसी का दम दिखाया है। एनडीए ने उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकारा।जाहिर सी बात है कि लालू के बेटे ने अपने को स्थापित कर लिया है। यही वजह है कि एनडी टीवी के कैमरा मैन कोे कहना पड़ा कि भीड़ इतनी उमड़ी है कि उसे 360 डिग्री में अपना कैमरा घुमाना पड़ा। अपने पिता का नाम और तस्वीर पोस्टर से हटा दिया। वो ऐसा करके बिहार की जनता को यह विश्वास दिलाना चाहा कि लालू को बेटा हॅू, मगर लालू जैसा नहीं। बिहार में नीतीश बेरोजगारी और शिक्षा के क्षेत्र में कोई चमत्कार नहीं कर पाए, इसलिए चुनाव में बेरोजगारी मुद्दा बना। तेजस्वी के दस लाख नौकरी के जवाब में सीतरमण को पटना में बीजेपी के घोषणा पत्र जारी करते हुए 19 लाख नौकरी का वायदा करना पड़ा।
बहरहाल बीजेपी अभी 73 सीट पर आगे चल रही है,वहीं राजद 75 सीट पर। यह रूझान इस बात का संकेत है कि बिहार में मोदी ने 370 का जिक्र किये, लेकिन उसका असर बिहार की जनता पर नहीं पड़ा। जायज भी है। इसलिए कि बिहार की जनता को 370 से क्या मतलब। उसे रोजगार,शिक्षा और रोटी चाहिए।
इस चुनाव में कांग्रेस बीस सीट पर बढ़त है। जाहिर सी बात है कि राहुल गांधी राजनीति के चाणक्य नहीं बन सकते, पाटिल पुत्र में भी जाकर। वे कांग्रेस को खड़ा नहीं कर सकते। कांग्रेसियों को यह मान लेना चाहिए। प्रियंका गांधी संभवतः कुछ सकती है। बहरहाल तेजस्वी आने वाली राजनीति के, कल साबित हो सकते हैं।
@रमेश कुमार "रिपु"