रमन के सपोट के बगैर टी.एस नहीं बन सकते मुख्यमंत्री
रायपुर। रमेश कुमार "रिपु" | प्रदेश में सरकार बनने के चार माह बाद सबसे पहले मैंने यह खबर राष्ट्रीय पत्रिका ओपिनियम पोस्ट और प्रथम प्रवक्ता में लगाया था कि ढाई साल बाद छत्तीसगढ़ के सीएम बदल दिए जाएंगे। अब स्थिति बदल गई है। दस जनपथ यदि छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बदलता है तो उसे राजस्थान और पंजाब का भी मुख्यमंत्री बदलना पड़ेगा। जाहिर है, कि दस जनपथ इतना बड़ा रिस्क नहीं लेगा।
छह माह बाद यूपी में चुनाव होना है। वैेसे भी जीतेन्द्र बीजेपी में जाकर कांग्रेस में हलचल मचा दिए हैं। भूपेश को हटाने की कोई वजह दस जनपथ के पास नहीं है। टी.एस सिंह देव के पास भी ऐसा कोई दम दार आधार नहीं है,जिसके जरिए वो दस जनपथ को कहें कि भूपेश को हटा दें।
पिछले एक पखवाड़े से टीएस सिंह देव को बीजेपी और कांग्रेस के कुछ लोग मुख्यमंत्री बनाने में लगे हैं। राहुल गांधी के समक्ष टीएस कहे थे भूपेश को सीएम बना दें हमें कोई एतराज नहीं है। दोनों साथ मिलकर काम कर लेंगे। ढाई साल में भूपेश बघेल ने नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने की दिशा में कई उल्लेखनीय काम किए हैं। साथ ही दाग भी उनकी सरकार पर लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भूपेश बघेल को राहुल गांधी हटाएंगे तो किस आधार पर। सरकार नहीं चला पा रहे हैं या फिर दस जनपथ की बातों को तरजीह नहीं दे रहे हैं? राहुल गांधी के कहे थे जिस दिन कांग्रेस की सरकार बनेगी किसानों को कर्जा माफ कर दिया जाएगा। भूपेश की सरकार ने किया। किसानों को बोनस भी दिए। राजीव गांधी न्याय योजना को केन्द्र ने भी सराहा। नरवा,गरवा,घुरवा और बारी कुछ हद तक ठीक है। तेन्दूपतत्ता बोनस राशि ढाई हजार से चार हजार रुपए किया गया। गोबर खरीदी योजना का भी लाभ लोगों को मिल ही रहा है।
▪️सरकार में खामियां है तो क्या..
विपक्ष ने भूपेश सरकार के खिलाफ 16 प्रकार की खामियांँ निकाली है। लेकिन जो खामियां विपक्ष ने गिनाया है उससे टीएस सिंह देव के मुख्यमंत्री बनने का आधार नहीं है। भूपेश बघेल ने ढाई साल में टीएस सिंह देव के पर कतरे हैं। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की बैठक की सूचना तक नहीं दी। सरकारी प्रवक्ता के पद से भी हटा दिए। उन्हें कई मामले में दरकिनार किए। टीएस ने कई बार किसानों के बोनस को लेकर सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया।
दिग्विजय सिंह से शिकायत भी किया भूपेश के काम काज की। लेकिन हुआ कुछ नहीं। दस जनपथ में भूपेश बघेल अपनी छाप इतनी मजबूत बना लिए हैं कि राहुल गांधी के समक्ष भूपेश और टीएस सिंहदेव के बीच हुआ सत्ताई समझौता अब कोई मायने नहीं रखता। पहले बाबा के साथ 35 विधायक थे भी,लेकिन अब उनके साथ सरगुजा जिले के विधायक भी नहीं है। संगठन के सारे पदों में भूपेश के लोग हैं। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया भी भूपेश के साथ हैं। ऐसे में टीएस बाबा कैसे मुख्यमंत्री बनेंगे,वो खुद भी नहीं जानते।
▪️रमन कुछ करा सकते हैं..
टीएस सिंह देव यदि मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्हें डाॅ रमन सिंह से हाथ मिलाना होगा वो भी सशर्त। बगैर बीजेपी में गए वो मुख्यमंत्री तभी बन सकेंगे यदि अमित शाह दखल दें तब। सीडी कांड के आरोपी हैं भूपेश बघेल। सीबीआई के पास मामला है। यह अलग बात है कि सीबीआई को कार्रवाई करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा इसलिए कि सरकार ने सीबीआई के खिलाफ एक बिल पास किया है।
लेकिन सीडी का मामला डाॅ रमन सिंह के समय का है,इसलिए कोर्ट से सीबीआई को अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सवाल यह है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने से बीजेपी को इससे क्या फायदा होगा यह अमितशाह को टीएस सिह देव को बताना पड़ेगा।
▪️क्या होगा सीएम बदले तो..
मुख्यमंत्री बदलने से पहले कांग्रेस को अपने सियासी नफा और नुकसान पर विचार करना होगा। टीएस सिंह देव क्या संगठन और सत्ता के बीच ढाई साल में तालमेल बना लेंगे। अगला चुनाव कांग्रेस को जीता लेंगें। भूपेश क्या टीएस सिंहदेव के अंडर में मंत्री बनना पसंद करेंगे? भूपेश के प्रोजेक्ट क्या चलते रहेंगे। यदि बदलाव किए तो उससे क्या लाभ या नुकसान होंगे।
मुख्यमंत्री बदलने पर क्या पूरा मंत्रीमडल बदलेगा। संसदीय सचिव बदले जाएंगे। संगठन के पदाधिकारी बदले जाएंगे। सच तो यह है कि अगले चुनाव तक भूपेश सीएम रहे तो भूपेश समर्थक नहीं चाहेंगे टीएस चुनाव जीतें। भूपेश के नेतृत्व में यदि कांग्रेस सत्ता में नहीं आई तो टीएस पर दाग नहीं लगेगा। दस जनपथ को क्या टीएस विश्वास दिला सकेंगे कि उनके मुख्यमंत्री बनने पर कांग्रेस के चेहरे पर झुर्रियांँ नहीं आएगी।
जाहिर है कि टीएस के पास कोई जवाब नहीं है।वैसे उनकी किस्मत में सीएम बनना लिखा है या नहीं वो खुद नहीं जानते। सौ बकरा काटने की शपथ मुकम्मल होगी,बहरहाल ऐसा नहीं दिखता।