राजस्थान | न्यूज़ डेस्क | नागौर जिले में नशा मुक्त अभियान के तहत पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। इसी सिलसिले में सुरपालिया थाना क्षेत्र के जानवा गांव निवासी बहादुर सिंह उर्फ समीर के करीब 50 लाख रुपये मूल्य के आलीशान मकान को पुलिस ने सीज कर लिया। यह कार्रवाई 11 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण के आदेश के बाद की गई।
पुलिस के अनुसार, बहादुर सिंह लंबे समय से स्मैक की सप्लाई में सक्रिय था और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले दर्ज हैं। इन मामलों में पुलिस पहले ही चालान पेश कर चुकी है। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने अवैध कमाई से नागौर के शारदापुरम इलाके में यह मकान बनवाया था। कुछ रिपोर्टों में इसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक भी बताई गई है।
लिव-इन पार्टनर के नाम पर संपत्ति दर्ज
कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी ने मकान अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम पर रजिस्टर्ड कराया था, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। हालांकि पुलिस ने ठोस दस्तावेजी साक्ष्य जुटाकर मामले को सक्षम प्राधिकरण के सामने रखा, जहां से मंजूरी मिलने के बाद संपत्ति सीज करने की कार्रवाई की गई।
पुलिस कार्रवाई के बाद भी दिखी बेपरवाही
सुरपालिया थाना पुलिस द्वारा मकान पर सीजिंग नोटिस चस्पा करने के कुछ समय बाद ही आरोपी ने उसे हटाने की कोशिश की। इस घटना को पुलिस ने गंभीरता से लिया है और इसे लेकर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। इस घटनाक्रम ने आरोपी के रवैये और कानून के प्रति उसकी अनदेखी को उजागर किया है।
पुलिस अधीक्षक का सख्त रुख
नागौर के पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा ने बताया कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। पिछले 15 दिनों में चार संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं और कुल पांच मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत यह अभियान और तेज किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना है, बल्कि तस्करों की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर करना है, ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।