हरियाणा | न्यूज़ डेस्क | हरियाणा में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी फंड के सैकड़ों करोड़ रुपये गबन करने का आरोप लगाया गया है | इस मामले में सरकार ने दो सीनियर IAS अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया है | आरोप है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से 590 करोड़ रुपये के सरकारी फंड को गलत तरीके से निकाल लिया गया | सरकार ने इस पूरे मामले की जांच अब CBI को सौंप दी है | ईडी की जांच में यह घोटाला उजागर हुआ था | यह मामला रियल एस्टेट, बैंकिंग और शेल कंपनियों से जुड़ा है, जिसमें फर्जी बिलिंग और फंड ट्रांसफर का खेल चला | 
कौन हैं ये दोनों IAS अधिकारी
इस घोटाले में जो नाम आएं हैं उनमें से पहला नाम प्रदीप कुमार का है | प्रदीप कुमार 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं | उनका जन्म 6 जून 1966 को हुआ था | उन्होंने M.Phil और M.Sc की डिग्री हासिल की है | उनका सेलेक्शन सबसे पहले हरियाणा सिविल सर्विसेज (HCS)में हुआ था जिसके बाद वर्ष 2011 में उन्हें IAS के पद पर प्रमोट कर दिया गया | जिसके बाद वह कई अलग अलग पदों पर रहे. सस्पेंड होने से पहले वे राज्य परिवहन के निदेशक और परिवहन विभाग के विशेष सचिव के पद पर तैनात थे | प्रदीप कुमार 30 जून को रिटायर होने वाले थे, लेकिन सस्पेंड होने के कारण उनकी ग्रेच्युटी और अन्य फायदे भी प्रभावित हो सकते हैं | इस घोटाले में दूसरा नाम है राम कुमार सिंह उर्फ आरके सिंह का आरके सिंह का जन्म 11 अगस्त 1967 को हुआ था | वह भी पहले हरियाणा सिविल सर्विसेज में सेलेक्ट हुए थे | वर्ष 2012 में HCS से IAS में प्रमोशन के लिए लिस्ट जारी हुई, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2019 में उन्हें IAS अधिकारी के रूप में प्रमोशन मिला | उन्होंने राजनीति विज्ञान में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है | आरके सिंह सस्पेंड होने से पहले राजस्व और आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के अतिरिक्त CEO के पद पर थे | उन्होंने 27 जुलाई 2025 से 28 जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम आयुक्त का पद भी संभाला था | उनकी रिटायरमेंट 30 नवंबर 2027 को होनी है | 
घोटाला कैसे हुआ
ईडी की जांच के अनुसार हरियाणा सरकार के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में रखे गए पैसे को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना था लेकिन आरोपियों ने बिना किसी अनुमति के इन पैसों को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया | इस घोटाले में कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया | सरकारी पैसे को सोने की खरीद के नाम पर फर्जी बिलिंग दिखाकर घुमाया गया | ईडी ने बताया कि यह घोटाला पिछले एक साल से चल रहा था | इसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली गई | अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 आम नागरिक और 1 सरकारी अधिकारी शामिल हैं | ईडी ने 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है | चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुड़गांव और बेंगलुरु में 19 जगहों पर तलाशी ली गई थी | फरवरी 2026 में पंचकूला के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में FIR दर्ज की थी, जिसके आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की |
हरियाणा सरकार ने दोनों IAS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है | सस्पेंड होने के दौरान दोनों का मुख्यालय मुख्य सचिव के कार्यालय में रहेगा | यह मामला रियल एस्टेट, बैंकिंग और सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है | जिसमें शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग का इस्तेमाल किया गया | CBI अब इसकी गहन जांच करेगी | दोनों IAS अधिकारी लंबे समय से हरियाणा प्रशासन में काम कर रहे थे | अब उनके सस्पेंशन और CBI जांच से पूरा मामला और साफ होने की उम्मीद है | सरकारी फंड के गबन जैसे गंभीर आरोपों में कोई भी बच नहीं सकता | इन दोनों अधिकारियों की कहानी उन युवाओं के लिए सीख है जो यूपीएससी सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटे हैं और आईएएस आईपीएस बनने का सपना देख रहे हैं |