कानपुर | न्यूज़ डेस्क | यूपी में कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट मामले में पुलिस का एक्शन लगातार तेज हो रहा है | फरार तीन फर्जी डॉक्टरों पर इनाम घोषित किया गया है, जबकि कई आरोपी पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं | पुलिस की टीमें अलग-अलग शहरों में लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द गिरफ्तारी नहीं होने पर कुर्की की कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है | 
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट मामले में पुलिस ने कार्रवाई जारी मामले में फरार तीन फर्जी डॉक्टर अली, अफजल और रोहित पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है | अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है | वहीं फरार आरोपियों की तलाश में एडिशनल पुलिस टीमें कई शहरों में लगातार दबिश दे रही हैं | पुलिस का कहना है कि अगर जल्द ही इनकी गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आगे कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी |
2019 में बाल-बाल बची थी महिला
कानपुर में सामने आया किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट अब सिर्फ एक ताजा आपराधिक मामला नहीं रह गया है | जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क की जड़ें पुराने मामलों, डोनर प्रोवाइडर गिरोह, और यहां तक कि लिवर ट्रांसप्लांट कनेक्शन तक जाती दिख रही हैं | पुलिस को एक व्हाट्सऐप ग्रुप मिला है, जिसमें 500 से ज्यादा नंबर सामने आए हैं | चौंकाने वाली बात ये है कि कानपुर में यह अवैध अंग कारोबार का पहला मामला नहीं है | साल 2019 में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें एक महिला नौकरी के बहाने कथित तौर पर किडनी गिरोह के जाल में फंसते-फंसते बची थी | 
मार्च में खुला था राज
यह पूरा मामला तब सामने आया जब कानपुर पुलिस ने मार्च के अंत में कल्यानपुर-रावतपुर क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों पर छापा मारा था | इनमें अहूजा हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल और मेड-लाइफ हॉस्पिटल शामिल थे, जहां से पांच डॉक्टरों समेत शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया | शिवम खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों और डोनर्स को फंसाने का काम करता था | पुलिस का कहना है कि इस रैकेट में किडनी डोनर को महज 8-10 लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि रिसीवर से 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक वसूले जाते थे | जांच में कई वीडियो और चैट भी बरामद हुई हैं, जिनमें इस काले कारोबार की पोल खुलती है |