हिगनघाट | डॉ विवेक बांबल | महिला सशक्तिकरण दृढ़ संकल्प संस्था हिंगणघाट की ओर से कवियत्री जरीना हुसैन बोहरा और शायर आरीफ काजी जोश की स्मृति मे आश्रय शहरी बेघर निवारा रेल्वे स्टेशन के पास फल,बिस्कुट और खाने की वस्तुएं भेंट दी गयी । तत्पश्चात कवि सम्मेलन - मूशायरे का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ शायर-कवि प्रा. आरीफ काजी जोश एवं-कवयित्री जरीना बोहरा को मौन रखकर श्रद्धांजली दी गयी उन दोनों के असमय निधन से साहित्य जगत में उपजे शून्य को शब्दों में पिरोते हुए एक भावपूर्ण साहित्यिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित की गई ।कार्यक्रम में कविता, ग़ज़ल और स्मृतियों के माध्यम से दोनों रचनाकारों को नमन किया गया। समारोह की अध्यक्षता अशोक जवादे ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में नगरसेविका सौ.शितल मोहता, सौ आम्रपाली पारवे ,सौ वृषाली मरतोडे नगरसेवक नरेंद्र वर्मा प्रमुखता से उपस्थित थे। 
अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने कहा कि आरीफ काजी की शायरी संवेदनाओं की आवाज़ थी और जरीना बोहरा की लेखनी में समाज, स्त्री-सशक्तिकरण की उम्मीद की झलकती थी। उनका असमय इस दुनिया से चले जाना साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। कवि-शायरों की सशक्त प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावुक कर दिया। प्रा. मजीद बेग मुगल, एड अब्दुल अमानी कुरेशी, प्रा. तजिंदर सिंघ आम्रपाली पारवे , वृक्षाली मरतोडे ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दिवंगत साहित्यकारों की स्मृतियों को जीवंत किया। हर पंक्ति में दर्द भी था और उम्मीद की रौशनी भी।
साहित्यिक श्रद्धांजलि को मानवीय सरोकार से जोड़ते हुए दिवंगत कवियों की स्मृति में में फल वितरण किया गया। इस सामाजिक पहल ने कार्यक्रम को संवेदना का सुंदर रूप प्रदान किया। प्रा.आरीफ काजी और जरीना बोहरा साहित्य की दुनिया में सदा जीवित रहेंगे। मंच संचालन प्रा मजीद बेगमुगल शहजाद ने किया तथा प्रस्तावित भाषण चंगेज खान तथा आभार प्रदर्शन सज्जाद हुसैन बोहरा ने माना, तन्नाजी ,भगत, जाकीर हुसैन भी प्रमुखता से उपस्थित थे।