हिगनघाट | न्यूज़ डेस्क | शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार का साधन नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के विकास का आधार है। शिक्षा के माध्यम को आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण ही स्कुल का लक्ष्य है |
यहीं से प्रारंभिक शिक्षा प्राए की और मान देश के सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान नाई है | कि भौतिक विकास जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह केवल आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की भूमिका केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रहकर संस्कार, संस्कृति और आध्यात्यिक मूल्यों के संवर्धन हैं |