नई दिल्ली | जगजीत सिंह | यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है | यहां किसी भी उम्मीदवार के लिए असफलता आम है और सफलता असाधारण | इस परीक्षा में सफलता के लिए कई उम्मीदवार सालों तक मेहनत करने के बाद भी लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो यह साबित कर देती हैं कि अगर हौसला मजबूत हो तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन सकती है | आईएएस वंशिका यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने पहले दो प्रयासों में प्रीलिम्स तक नहीं क्लियर किया, लेकिन तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर आईएएस अफसर बनने का सपना पूरा कर दिखाया | 
इंजीनियरिंग से आईएएस तक का सफर
आईएएस वंशिका यादव दिल्ली की रहने वाली हैं | उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी में शानदार नौकरी मिली | वंशिका ने बेंगलुरु में सिस्को (Cisco) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम किया, जहां उन्हें अच्छा पैकेज और स्टेबल करियर मिल रहा था | इसके बावजूद उनके मन में कहीं न कहीं सिविल सेवा में जाकर देश के लिए काम करने की चाह बनी हुई थी |
अक्सर देखा गया है कि कई लोग अच्छी नौकरी मिलने के बाद उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हैं, लेकिन वंशिका यादव ने जोखिम उठाने का फैसला किया | उन्होंने यह समझा कि अगर अपने सपनों को अभी नहीं जिया गया, तो जीवन भर इसका अफसोस रहेगा | इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी हाई-पैकेज नौकरी से इस्तीफा दिया और पूरी तरह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं | उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनके अंदर आईएएस बनने की इच्छा बेहद मजबूत थी |
दो बार की असफलता, फिर भी नहीं मानी हार
यूपीएससी की तैयारी के दौरान वंशिका को शुरुआती दो प्रयासों में निराशा हाथ लगी | वह पहले और दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं | ऐसे में अक्सर कई उम्मीदवार हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन वंशिका ने असफलता को सीख के रूप में लिया | उन्होंने अपनी रणनीति बदली, कमजोरियों पर काम किया और पहले से ज्यादा अनुशासित तरीके से तैयारी शुरू की|
तीसरे प्रयास में शानदार सफलता
उनकी लगातार मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा यह रहा कि वंशिका यादव ने तीसरे प्रयास में साल 2019 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली इतना ही नहीं, उन्होंने 2025 में से 1046 अंक हासिल करते हुए ऑल इंडिया छठी रैंक (AIR 6) प्राप्त की उनकी यह उपलब्धि लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई, खासकर उनके लिए जो शुरुआती असफलताओं के कारण खुद पर शक करने लगते हैं |
परिवार का मिला मजबूत सहारा
वंशिका की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है | उनके पिता राजकुमार यादव, जो सहायक उप-निरीक्षक (ASI) हैं और उनकी मां सरिता यादव ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया है | कठिन समय में परिवार का समर्थन ही वंशिका की सबसे बड़ी ताकत बना और उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना जारी रखा |