मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ पंडित विनोद जी | मार्गशीर्ष पूर्णिमा का विशेष महत्व हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है | मार्गशीर्ष मास को महापूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि जगत के पालनहार भगावन विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने गीता में अपना स्वरूप इसी महीने में बताया है | मार्गशीर्ष पूर्णिमा बड़ी कल्याणकारी तिथि मानी जाती है | ये तिथि उर्जा से भरी होती है |
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है | मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने पुण्य फल प्राप्त होते हैं | जीवन में शुभता आती है | इस तिथि पर पड़ने वाला ब्रह्म मुहूर्त बड़ा दिव्य माना जाता है | इसमें कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना बहुत उत्तम माना गया है | इस दिन मंत्रों का जाप करने से जीवन में लाभ ही लाभ होता है | 
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 ब्रह्म मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा 4 दिसंबर को मनाई जाएगी | इसी दिन इसका व्रत और स्नान-दान किया जाएगा | इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगा | ये ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 58 मिनट तक रहेगा | इस दिन ब्रह्म मुहूर्त लगभग 39 मिनट का रहेगा | शास्त्रों में इस अबूझ घड़ी का विशेष महत्व वर्णित है |
ब्रह्म मुहूर्त में 5 महामंत्रों का जाप देगा लाभ
- ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद
- श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ नमो नारायणाय
मार्गशीर्ष पूर्णिमा: स्नान-ध्यान की विधि
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा की सुबह स्नान के जल में तुलसी पत्र डालना चाहिए |
- पहले उस जल को सिर पर छिड़कें और नमस्कार करें |
- इसके बाद स्नान करना चाहिए |
- स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए |
- इसके बाद मंत्रों का जाप करना चाहिए |
- इसके बाद सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए |
- फिर सफेद चीजों का दान करना चाहिए |
- रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए |