September 19, 2025

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जन सुनवाई में जिले की महिलाओं ने लिया उत्साह पूर्वक भाग

महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रुपाली चाकणकर की उपस्थिति में हुई जनसुनवाई




नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरेशी । महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग  की अध्यक्षा रूपाली चाकणकर   ने कहा विवाह संस्था भारतीय समाज की नीवं है,  इसे मजबूत बनाए रखने के लिए न केवल विवाह के बाद बल्कि विवाहपूर्व परामर्श पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

'महिला आयोग आपके द्वार' कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के नियोजन भवन में आयोजित जनसु नवाई में कुल 68 शिकायतें दर्ज की गई, जिनमें से अधिकांश पारिवारिक और वैवाहिक स्वरूप की थी। शिकायतों के निवारण के लिए चार पैनल बनाए गए, जिनमें विधिज्ञ, पुलिस अधिकारी, सेवाभावी संस्थाओं के प्रतिनिधि और महिला एवं बाल सहायता केंद्र के  समुपदेशक शामिल थे। पैनलों ने सभी समस्याओं को सुना और जिन मामलों पर तुरंत कार्रवाई संभव नहीं थी, उन्हें संबंधित विभागों को भेजने की सिफारिश की।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि कार्यस्थलो पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु POSH कानून का प्रभावी पालन और ऑडिट अनिवार्य किया जाए। रूपाली चाकणकर  ने कहा कि आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके साथ होने वाले अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ सशक्त तरीके  से काम करता रहेगा। जनसुनवाई में जिले की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, और सभी को पंजीकरण टोकन के माध्यम से पैनल के सामने अपनी समस्याएं प्रस्तुत करने का मौका मिला।

गुरुवार को आयोजित जनसुनवाई में कुल 58 शिकायतें दर्ज की गई. जिनमें से अधिकांश पारिवारिक प्रकृति की थीं। महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए चार पैनल तैयार किए गए थे। पहले पैनल में अध्यक्ष रुपाली चाकणकर के साथ जिलाधिकारी डॉ. विपीन इटनकर, जिला पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हर्ष पोद्दार, आयोग की सदस्य सचिव नंदिनी आवडे, महानगर पालिका की अतिरिक्त आयुक्त वैष्णव बी जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव एड. प्रवीण उन्हाळे और पुलिस उपायुक्त राहुल माकणीकर शामिल थे। अन्य पैनलों में विधिज्ञ, पुलिस अधिकारी,सेवाभावी संस्थाओं केप्रतिनिधि, महिला एवं बाल सहायता केंद्र के समुपदेशक और अन्य अधिकारी शामिल थे। पैनलों ने महिलाओं की समस्याओं को समझा और जिन शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई संभव नाहीं थी, उन्हें संबधित विभागों को भेजने की सिफारिश की गई।

68 शिकायतों में 37 वैवाहिक एवं पारिवारिक, 14 सामाजिक  7 आर्थिक और संपत्ति संबंधी, 8 कार्यस्थल पर होने वाली समस्याएं और 2 अन्य प्रकार की थीं।  68 शिकायतों में एक  शिकायत  ऐसी भी थी जिसमें  एक महिला ने अपने 4 महीने के शिशु के कस्टडी की मांग की , जिसे आयोग ने स्वीकार  कर लिया।

सभी शिकायतों को चेयरमैन रूपाली चाकणकर और पैनल सदस्यों ने गंभीरता से सुना और कार्रवाई की। महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए चार पैनल बनाए गए थे, जिनमें विधि विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी, सेवाभावी संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्थानिक तक्रार समिती के सद्स्य, महिला और बाल सहायता केंद्र के समुपदेशक और अन्य शामिल थे। पैनलों ने महिलाओं की समस्याओं को समझा।



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