रीवा। समशेर सिंह गहरवार। जिले के बाणसागर नहर परियोजना से है जहां शासन स्तर से नहर मरम्मत और सफाई के लिए हर साल लाखों की राशि भेजी जाती है। जिस राशि से सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा मेन नहर से लेकर माइनर नहरों की मरम्मत, सफाई, रख रखाव का कार्य किया जाता है। पर सिंचाई विभाग के जवाबदार अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की इबारत लिखने में इतना माहिर हैं की क्योटी नहर संभाग की मेंन नहर से लेकर छोटी शाखाओं की पिछले पांच सालों से किसी तरह से मरम्मत और सफाई का काम नहीं कराया गया है। मरम्मत और सफाई के लिए शासन स्तर से सालों से आ रही राशि का रिकार्ड में बकायदा उपयोग कर रिकार्ड दुरस्त किया गया है।
इस पूरे मामले में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती दिख रही है। लाखों रुपये के बजट की राशि को सिंचाई विभाग के जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारियों ने नहर की मरम्मत और सफाई कराए बगैर कागजों में खर्च करके पूरी की पूरी राशि डकार गए हैं। इन भ्रष्ट अधिकारियों के कारनामों से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई मेंन नहर और छोटी नहरें जगह-जगह से ब्लॉक हो गई हैं। नहरों का पानी टेलपोर्शन तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे किसानों के खेतों में अनाज बोनी हेतु पलेवा और खड़ी गेहूं आदि फसलें सूख रहीं हैं।
सिंचाई विभाग के अफसरों के द्वारा मेन नहर से लेकर उससे निकलने बाली छोटी नहरें शाखाओं की लंबे समय से मरम्मत और देखरेख जैसी महत्व पूर्ण दायित्व को नहीं निभाया जा रहा है जिसकी वजह से क्योटी नहर परियोजना के मझिगवा, चमन चौराहा, तिलखन, बैकुंठपुर, उमरी, बदराव, खैरहन, बेलवा, भेड़रहा, पड़री, सदहना, मरैला इलाकों में कई जगहों से तो छोटी नहर शाखाओं की कैनाल ही गायब हो गई हैं।
नहर में जगह_जगह बबूल, बैर, लिप्टिस, जहरीली घास, आई पोनिया जैसे वृक्ष समूचे नहर की कंक्रीट फाड़कर विशाल रूप लेकर अपना कब्जा जमाए हुए हैं। नहर का पानी इस इलाके के किसानों के खेतों में भर चुका है। जिसकी शिकायत किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं। फिर भी जिम्मेदार अधिकारियो की बेईमानी कहें या लाचारी इन भ्रष्टाचार की इबारत लिखने वाले अधिकारियों को किसी का भय नहीं है। और गरीब किसानों की सुध तक नहीं ले रहे हैं। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात करने पर नहर सफाई का दावा किया गया है जो मौके में पहुंचने पर नहरें और किसान अपना_अपना दुख कुछ और बयां करते दिख रहे है।
जहां एक और शासन सत्ता में बैठे लोग दिन रात एक करके इन्ही भ्रष्ट अधिकारियों के विश्वास में किसानों के खेत सिंचाई को लेकर वादे और दावे करते हैं, समूचे रीवा जिले में नहर का जाल बिछाने के लिए हर सभा महफिल में घोषणाएं करते है, वहीं नहर विभाग के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक जिले में अपना पैठ बनाकर भ्रष्टाचार की इबारत लिख डालते हैं। इस पूरे मामले की हकीकत जमीन में उतरने के बाद कुछ और बयां करती दिखाई दी है।
सबसे बड़ा सवाल..आखिर इन भ्रष्ट अधिकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है? शासन द्वारा हर साल दी जाने वाली नहर सफाई और मरम्मत की राशि कहां जा रही है? ये तो समय ही बताएगा पर क्योटी नहर की सफाई नहर बनने के बाद और वर्तमान से पांच साल पहले मात्र एक बार ही कराई गई थी। बहरहाल क्योटी नहर संभाग में मेन नहर से लेकर छोटी नहरों का पिछले पांच सालों से कोई मरम्मत या सफाई नहीं कराई गई है ।