बिहार | न्यूज़ डेस्क | बिहार के गोपालगंज के चनावे मंडल कारा में एक विचार कैदी के हरतांगेज कारनामे से वकीलों की टीम हैरान करने वाली है। कैदी ने अपने मालद्वार में एक फुट बोर पाइप डाल ली। उसकी तबियत को इलाज के लिए सदर अस्पताल के वार्ड में भर्ती किया गया था, जहां गंभीर होने पर डॉक्टरों की टीम ने बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के वार्ड में भर्ती कर दी थी। कैदी ने ऐसा क्यों किया |
बरौली थाना क्षेत्र के रहने वाले विचाराधीन कैदी की हत्या के प्रयास के मामले में चनावे मंडल कारा में बंद है। रविवार की रात उसने अपने मालद्वार में एक पाइप डाल ली। उसके बाद उसने पाइप को खुद से बरामदे की कोशिश की तो पाइप और भी अंदर की ओर चला गया। इसके बाद परेशानी बढ़ती गई और उसने मंडल कारा के आदेश को इसकी जानकारी दी। सोमवार को पूरे दिन मंडलाकारा में ही उनका इलाज हुआ। सूरतेहाल में बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल के वार्ड में भर्ती नहीं की गई, जहां अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड के गठन से कैदियों का इलाज शुरू कर दिया।
गोपालगंज सदर अस्पताल की एक्सरे जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल के रीढ़ की हड्डी के पास एक लंबे पाइप के आकार की वस्तु फंसी हुई है। मेडिकल बोर्ड के चिकित्सक डॉ. एयरक्राफ्ट केसरी का कहना है कि एक्सरे जांच रिपोर्ट में साफा ने देखा कि रीढ़ की हड्डी के पास एक लंबे पाइप के आकार का वास्तुशिल्प के आकार का आकार है। इसकी लंबाई एक फीट तक और एक इंच मोटी बताई जा रही है। डॉक्टर ने कहा कि कैदी ने खुद से पाइप डाला है। कैदी ने ऐसा क्यों कहा, इसके बारे में उसने कुछ नहीं कहा है |
कैद के हरतअंगेज करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले एक कैदी ने गैंगस्टर के डॉक्टर से मोबाइल छीन लिया था, जिस पर पी आरोपियों ने आरोप लगाए थे और आरोपी की टीम ने बिना ऑपरेशन किए लेजर के जरिए मोबाइल को बाहर निकाला था। बोर्ड के चिकित्सक डॉ विमान केसरी का कहना है कि एक्सरे जांच रिपोर्ट में साफ नजर आया कि रीढ़ की हड्डी के पास एक लंबा पाइप के आकार जैसा वास्तु फंसा हुआ है इसकी लंबाई तकरीबन एक फीट तक और मोटी 1 इंच से आसपास बताई जा रही है | डॉक्टर ने कहा कि कैदी ने खुद से पाइप को इंसर्ट किया है | कैदी ने ऐसा क्यों किया, इसके बारे में उसने कुछ नहीं कहा है |
कैदियों के हैरतअंगेज करनामें का यह कोई पहला मामला नहीं है | इसके पहले एक कैदी ने पकड़े जाने के डर से मोबाइल को ही निकाल लिया था, जिसे पीएमसीएच रेफर किया गया था और डॉक्टरों की टीम ने बिना ऑपरेशन किए लेजर के जरिए मोबाइल को बाहर निकाला था |