रायपुर | रमेश कुमार "रिपु" | भाजपा अब हर जगह हार रही है। अच्छे दिन देने तक में नाकाम रही। राजनीति में भी उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। यू.पी के पंचायत चुनाव में योगी की गेरूआई राजनीति मलीन हो गई। जाहिर सी बात है, कि अगले विधान सभा चुनाव में बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी। मध्यप्रदेश में दमोह सीट बीजेपी की हार इस बात के संकेत हैं, कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव भी बीजेपी हार जायेगी।
कोरोना से बचाव का प्रबंध तंत्र में नकारा साबित हुई केन्द्र और राज्य की बीजेपी सरकार। तीसरी लहर कोरोना की और भी खतरनाक रहेगी। दोनों दौर में अब तक करीब पौने चार लाख लोगों की मौत देश में हुई। जाहिर सी बात है, कि देश के पी.एम. सिर्फ लच्छेदार भाषणा देने की कला में माहिर हैं। पी.एम यदि समझदार होते, तो बंगाल में 18 रैली न करते। केरल में पाँच रैली। तमिलनाडु में 7 रैली की। अस्पताल का दौरा एक भी नहीं। किसी अस्पताल से सीधे बात भी नहीं की। सवाल यह है, कि सरकार बनाना जरूरी है,अथवा लोगों की जिन्दगी बचाना। मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग पर हत्यारा जैसी तल्ख टिप्पणी की। सवाल यह है कि उस पर क्या कोई आरोप तय नहीं होना चाहिए, जिसने अपनी आम सभा में लाखों लोगों को कोरोना की गाइड लाइन को दरकिनार करके एकत्र किया ? पाँच राज्यों में कोरोना फैलने की जवाबदेही क्या पी.एम और गृहमंत्री पर नहीं बनती?
यूपी में योगी फेल हो गए,पंचायत चुनाव के परिणाम यही बताते हैं। पंचायत चुनाव से जाहिर है, कि विधान सभा चुनाव भी बीजेपी हार जायेगी। बीजेपी के गढ़ में सपा और बसपा ने सेंध लगाई। ऐसा लगता है, कि यूपी में अगली सरकार सपा की बनेगी। बीजेपी को कुल 765 सीट मिली ,जबकि सपा को 750, बसपा को 350 सीटें मिली। जबकि पंचायत चुनाव सरकार के पक्ष में रहते हैं। बंगाल में पी.एम. हार गये। गृहमंत्री दो सौ सीट का दावा कर रहे थे। अस्सी भी नहीं पाए।
कोरोना 2025 तक रहेगा। यानी यह बीजेपी की जान लेकर ही जायेगा। संभावना है, कि अगला लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी को विपक्ष पी.एम का चेहरा बताकर चुनाव लड़े। तब तक बीजेपी को जनता अपने स्नेह का आॅक्सीजन देगी, इसमें संदेह है।
@ रमेश कुमार "रिपु"