माह- ए-रमजान में रमजान के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज पढ़ी गई। कल ईद मनाई जाएगी।
मुंबई । न्यूज डेस्क । अरब देशों सऊदी अरब, यूएई, कतर समेत खाड़ी देशों में शुक्रवार (21 अप्रैल) को ईद उल फितर यानी मीठी ईद की मिठास घुली रही। वहीं भारत में माह- ए-रमजान में आखिरी जुमे को अलविदा नमाज पढ़ी गई। इसी के साथ इबादत और पाकीजगी वाले रमजान के 29 रोजे पूरे हुए। शाम को लोगों ने बेसब्री से ईद के चांद का इंतजार किया, आखिर शाम को दीदार-ए-चांद हुआ। इसके साथ ही भारत में कल यानी 22 अप्रैल शनिवार को ईद मुबारक के मनाए जाने की तस्वीर भी साफ हो गई। रांची और असम में चांद नजर आया है।
रमजान का पाक माह पूरा होने के बाद इस्लामिक कैलेंडर के शव्वाल महीने के पहले दिन ईद मनाई जाती है। दुनियाभर का मुस्लिम समुदाय इस पाक महीने में रोजा रखता हैं और पूरे महीने अल्लाह की इबादत की जाती है। सऊदी अरब में 29 दिनों का रमजान 20 अप्रैल को पूरा हुआ, इसलिए वहां 21 अप्रैल को ईद मनाई गई।
भारत में भी शुक्रवार को चांद देखने के बाद 22 अप्रैल को ईद मनाने की उम्मीद की जा रही थी। ईद से एक दिन पहले रोजेदारों सहित अन्य लोगों ने अलविदा की नमाज पढ़ी। हदीस शरीफ में जिक्र है कि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जुमे के रोज ही जन्नत से दुनिया में भेजा गया था। कहा जाता है कि जुमे के दिन ही वो जन्नत वापस लौटे थे। इसलिए मान्यता है कि जुमे की नमाज अदा करने से गुनाहों से पीछा छूट जाता है। जुमे की एक नमाज अदा करना 40 नमाज अदा करने का सवाब देता है।
ईद की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़
रोजेदारों की इबादत के बाद ईद का दिन मुबारक होता है। इसकी तैयारी में लोग उत्साह से लबरेज रहते हैं। इसका सुबूत शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के बाजारों में देखने को मिला। ईद की खरीदारी में लोगों ने तपती गर्मी की परवाह की और न ही सर्द मौसम की। यूपी से लेकर कश्मीर तक सब लोग ईद मनाने के जोश से भरे रहे है। सेवइयां की दुकानें हो, चूड़ी की दुकान हो, फल की दुकानें हो या फिर कपड़ों की हर तरफ लोगों की भीड़ रही।
मेहंदी लगाने वाले की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ रही। ईद उल फितर के मौके पर रोजेदार और पूरा घर मिलकर सुबह ईद की तैयारी करते हैं। कुछ मीठी चीज खाते हैं। इस ईद में मीठी सेवइयां खाने का रिवाज है. इसके साथ ही चार रकात नमाज़-नफील चाश्त (खास नमाज) अदा करते हैं। इसके बाद लोग अल्लाह से दुआ करते हैं।" इस दिन मुसलमानों में कुनबे का हर शख्स फित्र अदा करता है और गरीबों को तलाश करके उन्हें कुछ रकम देता है।