मुंबई | न्यूज़ डेस्क | विश्व भर में हर साल 22 अप्रैल को वर्ल्ड अर्थ डे मनाया जाता है। इस दिन को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है। मनुष्य ने अपनी जिंदगी को आसान बनाने के लिए पर्यावरण को कई तरह से नुकसान पहुंचाया है और अब भी पहुंचा रहा है। यही गलतियां पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ावा दे रही हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण लू, सूखा, बाढ़, तूफान और खतरनाक मौसम जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं।
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता होगा की आखिर हर साल 22 अप्रैल को ही पृथ्वी दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है। 1960 और 1970 के दशक में लोगों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंधाधुंध पेड़ों का काटना शुरू कर दिया। जंगल पूरी तरह से नष्ट हो गए। वहीं, दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए साल 1969 में वॉशिंगटन में एक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें विस्कोंसिन के अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने ऐलान किया कि साल 1970 में देशभर में पर्यावरण को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।
फिर 1970 में हुए इस प्रदर्शन में स्कूल, कॉलेज और इंस्टीट्यूट्स ने आगे आकर हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इसके दो साल बाद तक अर्थ डे मनाने के प्रयास चलते रहे और 1970 में पहली बार पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया गया।
अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण शिक्षा के रूप में इस दिन की स्थापना की थी। जिसके बाद से हर साल 22 अप्रैल को वर्ल्ड अर्थ डे मनाया जाने लगा। साल 1970 से शुरू हुए इस दिवस को आज पूरी दुनिया के 192 से अधिक देश मनाते हैं। वहीं, अमेरिका में इस दिन को ट्री डे के नाम से भी जाना जाता है।
साल 1970 के अंत में अमेरिकी सरकार ने पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी बना ली थी। इसकी शुरुआत में लोगों का ध्यान केवल प्रदूषण पर ही था। जिसके बाद धीरे-धीरे 1990 के दशक में लोग जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसे व्यापक मुद्दों के बारे में भी सोचने लगे। 22 अप्रैल 1970 को आयोजित पहले वर्ल्ड अर्थ डे में 20 मिलियन अमेरिकी लोगों ने भाग लिया था जिसमे हर वर्ग, हर क्षेत्र के लोग शामिल हुए थे।