नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने महाबली इंजन का टेस्ट किया है | तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में 14 मार्च 2026 को CE20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट किया गया | यह टेस्ट 22 टन के जबरदस्त थ्रस्ट (शक्ति) पर किया गया, जो भारत के सबसे भारी रॉकेट LVM3 की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा | इससे पहले यह इंजन 19 टन थ्रस्ट पर टेस्ट किया जा रहा था | इस अपग्रेड का सीधा मतलब यह है कि अब भारत अपने भारी सैटेलाइट्स को और भी आसानी से अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर सकेगा | 
22 टन थ्रस्ट 165 सेकंड के इस टेस्ट से भारत ने लगाई बड़ी छलांग
इस इंजन का परीक्षण समुद्र-स्तर पर 165 सेकंड के लिए किया गया | यह प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि हाई-प्रेशर और वाइब्रेशन के कारण इंजन के नोजल को नुकसान पहुंचने का डर रहता है | वैज्ञानिकों ने इसके लिए खास ‘नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम’ (NPS) का इस्तेमाल किया | पूरे टेस्ट के दौरान इंजन ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया | यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि अब LVM3 रॉकेट के भविष्य के मिशनों में उन्नत C32 स्टेज का इस्तेमाल होगा | इससे रॉकेट की पेलोड ले जाने की क्षमता में भारी इजाफा होगा | 
गगनयान मिशन के लिए यह क्यों है गेम-चेंजर
CE20 इंजन का यह सफल टेस्ट सिर्फ वजन उठाने तक सीमित नहीं है | इस एक अकेले इंजन ने अब तक रिकॉर्ड 20 बार हॉट टेस्ट पूरे किए हैं | इसके जरिए गगनयान मिशन के लिए जरूरी ‘इग्निशन मार्जिन’ और ‘बूट-स्ट्रैप मोड’ जैसी जटिल तकनीकों का भी सफल प्रदर्शन हुआ है | इसमें लगे स्वदेशी टर्बोपंप बेयरिंग और सेंसर्स ने भी खुद को साबित किया है | इसका मतलब है कि अब हमारा गगनयान मिशन और भी सुरक्षित और शक्तिशाली हो गया है |