प्रिंस फिलिप भारत के आखरी विसरॉय लॉर्ड मॉउंटबैटन के भतीजे थे
मुंबई | मनिंदर सिंह | प्रिंस फिलिप ने १९४८ मैं अपना नाम बदल कर फिलिप मॉउंटबैटन दिया था | ब्रिटिश परंपरा के अनुसार जब भी कोई संतान का जन्म होता हे तो उसे अपने पिता का सरनेम मिलता है | यदि ऐसा नहीं होता तो उस औलाद को ब्रिटिश कानून के तहत नाजायज़ माना जाता है |
जब प्रिंस चार्ल्स का जनम हुआ तब प्रिंस फिलिप ने कई बार महारानी से बच्चे को अपने पिता का आखरी नाम उपयोग करने के लिए कहा परन्तु महारानी और उनकी माता क्वीन मैरी ने फिलिप की एक न सुनी जिससे उनके रिश्ते मैं काफी तनाव भी आया था | बहुत कम लोग यह जानते हैं की प्रिंस फिलिप भारत के आखरी विसरॉय लॉर्ड मॉउंटबैटन के भतीजे थे |
जब रानी एलिज़ाबेथ को तीसरी संतान होने वाली थी तब लार्ड मॉउंटबैटन और प्रिंस फिलिप ने सारे बच्चो का आखरी नाम बदलने का दबाव बनाया था और पुराना ब्रिटिश कानून बताया था जिसके तहत ऐसा न होने पर सारी औलाद नाजायज़ मानी जाती।
अंत में रानी एलिज़ाबेथ ने उनकी बात मानी और उनके परिवार के सभी बच्चो का नाम मॉउंटबैटन-विंडसर किया गया | जिसकी वजह से प्रिंस चार्ल्स और प्रिंस एंड्रू का पूरा नाम आज भी मॉउंटबैटन-विंडसर है |