मुंबई | ऋषि भट्ट |हर किसी को साफ-सुथरे कपड़े पहनना पसंद है| साफ कपड़े पहनने से एक ओर जहां बीमारियों से बचा जा सकता है तो दूसरी ओर लोगों के बीच शर्मिंदगी भी नहीं महसूस होती है | मगर एक्सपर्ट्स ने हाल ही में एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे | जानकारों ने दावा किया है कि अगर पृथ्वी को नष्ट होने से बचाना है तो गंदे-बदबूदार कपड़े पहनना सही निर्णय होगा |
वॉशिंग मशीन का पर्यावरण पर पड़ता है बुरा प्रभाव
जी हां, आपने सही पढ़ा. तो चलिए आपको बताते हैं कि जानकारों ने ऐसा क्यों कहा है | दरअसल, सोसाइटी ऑफ केमिकल इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि वॉशिंग मशीन से कपड़े धुले जाने पर धरती को काफी नुकसान पहुंचता है | उनके अनुसार जब से वॉशिंग मशीन का उपयोग बढ़ा है तब से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है | एक बार वॉशिंग मशीन का उपयोग करने से हम 7 लाख से ज्यादा माइक्रोस्कोपिक प्लास्टिक फाइबर पर्यावरण में रिलीज करते हैं | ये प्लास्टिक फाइबर कपड़ों से निकलता है जो नालियों के रास्ते नदी, नहरों तक जाता है और जलजीवों पर बुरा प्रभाव डालता है |
कितने दिन में धुलने चाहिए गंदे कपड़े
इस आधार पर एक्सपर्ट्स ने कपड़ों को धुलने के लिए समय बताया है जिसका पालन करने से हम पर्यावरण को भी बचा सकते हैं और कपड़ों को भी जल्द खराब होने से रोक सकते हैं | जानकारों ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार जीन्स महीने में सिर्फ एक बार धुलनी चाहिए वहीं ट्राउजर या जंपर्स को 15 दिनों में एक बार धुलना चाहिए |
पैयजामा को हफ्ते में एक बार धुला जा सकता है | रिपोर्ट में बताया गया है कि जिम में पहनने वाले कपड़े और अंडरवियर को रोज धोया जाना चाहिए मगर उन कपड़ों को वॉशिंग मशीन के जगह हाथ से धुला जाना चाहिए | जानकारों ने बताया कि महिलाओं के टॉप 5 बार पहनने के बाद धुले जाने चाहिए, ड्रेसेज को 4 से 6 बार पहनने के बाद धुलना चाहिए और महिलाओं की ब्रा को हफ्ते में एक बार धुला जाना चाहिए | सस्टेनबल क्लोदिंग ग्रुप के को-फाउंडर ओर्सोला डी कैस्ट्रो ने कहा कि पहले जब वॉशिंग मशीन नहीं थी तब लोगों को कपड़े धुलने में काफी समस्या होती थी इस वजह से तब लोग कम कपड़े धुलते थे |