रायपुर । मिनल केडेकर । नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए भाजपा के द्वारा किये जा रहे कार्यक्रम का झूठा श्रेय लेने की कवायद है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि महिलाओं की विधानमंडलों में आरक्षण कांग्रेस की समतावादी सोच का परिणाम है। भाजपा की विचारधारा तो महिला आरक्षण की विरोधी रही है। कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी हमेशा से प्रयत्नशील थे कि महिलाओं को उनका पूरा अधिकार मिले। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने इस हेतु ठोस प्रयास भी किया था। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा राजनैतिक मजबूरी के कारण आरक्षण बिल लाने जा रही है। भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार अपनी जनविरोधी नीतियों के कारण अलोकप्रिय हो चुकी हे। मोदी सरकार के विफलता के कारण देश में महंगाई, बेरोजगारी चरम पर है। महंगाई से सबसे ज्यादा परेशान महिलाएं है। महिलाओं की नाराजगी दूर करने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से आधी आबादी को उसका पूरा अधिकार देने की पक्षधर रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल लाने के लिये प्रधानमंत्री मोदी से बात किया था। कांग्रेस की सरकारों ने समय-समय पर इस हेतु प्रभावी कदम भी उठाया है। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगरपालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। यह 40 प्रतिशत के आसपास है। कांग्रेस ने अपनी कार्यसमिति में भी महिला आरक्षण के लिये प्रस्ताव पारित किया है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यूपीए की चेयरपर्सन रहते महिला आरक्षण लागू करने के लिये अनेकों बार ठोस पहल किया, तब भाजपा विपक्ष के रूप में इस पर रोड़ा अटकाते रही है। वर्तमान में भी चुनावी हार को देखते हुये महिला आरक्षण बिल लाया गया है।