"समय और संस्कार"
मात-पिता तुम करो जतन,
संतान का न हो कभी पतन।
स्नेह सुधा से सींचो जीवन,
पुलकित हो शुद्ध तन और मन।
प्रतिदिन दो संतान को अनमोल समय,
परिवार का न होगा कभी क्षय।
समय दोगे तो विश्वास बढ़ेगा,
घर-आँगन से विवाद घटेगा।
मोबाइल की दुनिया कुछ छोड़ो,
बच्चों संग प्रेम नाता जोड़ो।
सुनो उन्हें, समझो उनकी चाह,
यही है सच्चे स्नेह की राह।
रोटी, कपड़ा, मकान आवश्यक हैं,
पर संस्कार ही जीवन के रक्षक हैं।
समय का स्पर्श है स्नेह की छाया,
संस्कारों से मानव श्रेष्ठ कहलाया।
जब माता-पिता बनें आदर्श उदाहरण,
बच्चे सीखें उत्तम आचरण।
संयम, शील और मधुर विचार,
बनते जीवन के आधार।
समय और संस्कार जहाँ बसते,
सुख-शांति के दीपक हँसते।
इनसे ही उज्ज्वल हो संसार,
इनसे महके हर परिवार।
रचयिता- डॉ. अशोक कुमार वर्मा