इंदौर | न्यूज़ डेस्क | इंदौर के अस्पतालों में इन दिनों 18 साल से कम उम्र की गर्भवतियां बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। ये नाबालिग आसपास के जिलों धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर से यहां गर्भपात और प्रसव के लिए आ रही हैं। सालभर में ही शहर के अस्पतालों में 435 सोनोग्राफी फॉर्म एफ की रिपोर्ट हुई, जिनमें उनकी उम्र 18 साल से कम थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 187 गर्भवती निकलीं। इनकी उम्र मात्र 14 से 17 वर्ष थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ है। इसे लेकर इंदौर की बाल कल्याण समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त और कलेक्टर को पत्र लिखा है। समिति ने उनसे तुरंत जांच कर एक्शन लेने के लिए भी कहा है। दरअसल, नाबालिग लड़कियों को अलग-अलग रास्तों से इंदौर लाया जा रहा है और यहां उनकी सोनोग्राफी और गर्भपात हो रहा है। यह सब बिना किसी सूचना और तय प्रक्रिया के हो रहा है, जबकि नियमानुसार पुलिस प्रशासन और बाल कल्याण समितियों को सूचना देना जरूरी है | 
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)- 5 के मुताबिक मध्यप्रदेश में 20 से 24 साल की 23% महिलाओं का विवाह 18 साल से पहले हो जाता है, जिससे कम उम्र की गर्भावस्था के मामले बढ़ते हैं। इंदौर जिला एडवायजरी बोर्ड में रखी जा रही रिपोर्ट में 16 से 17 साल की कम उम्र में लड़कियों की गर्भावस्था की पुष्टि हो रही है। दस्तावेजों पर पति का नाम भी दर्ज है। यानी कुछ मामलों में बाल विवाह की आशंका है। प्रदेश में 23% महिलाओं का विवाह 18 साल से पहले पॉक्सो और किशोर न्याय अधि. का सीधा उल्लंघन इंदौर के कई अस्पतालों में नाबालिग बालिकाओं के प्रसव और गर्भपात के केस सामने आए हैं पर अस्पतालों ने इसकी जानकारी न तो बाल कल्याण समिति को दी और न ही प्रशासन या पुलिस को। समिति के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र पंड्या ने कहा है कि यह पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। प्रशासन को इस पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए। इस तरह की गड़बड़ी बहुत घातक है। हर साल औसत 350 सोनोग्राफी संदिग्ध जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की जांच में हर साल औसतन 350 सोनोग्राफी रिपोर्ट ऐसी मिल रही हैं, जिनमें लड़कियों की उम्र 18 साल से कम है। इनमें एक चौथाई से ज्यादा गर्भवती निकल रही हैं। बावजूद इसके इस स्थिति से निपटने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। विभाग सामान्य गतिविधियां ही चला रहे हैं।
विशेष सोनोग्राफी के लिए आईडी, फॉर्म एफ अनिवार्य
गर्भावस्था या किसी ऐसी ही अन्य उम्र संबंधी समस्या के लिए अगर सोनोग्राफी करवाई जाती है तो फार्म एफ भरना अनिवार्य होता है और उसकी जानकारी भी जिला प्रशासन को भेजना पड़ती है। बाल विकास समिति की यह रिपोर्ट इन्हीं फॉर्म के विश्लेषण के आधार पर तैयार हुई है। हर साल इस तरह के मामले आ रहे हैं। आगे उन नाबलिग का क्या होता है, उसकी जानकारी कहीं नहीं है। महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यक्रम प्रबंधक रजनीश सिन्हा ने बताया कि हमें जो रिपोर्ट्स मिलती हैं, वह उम्म्र के सत्यापन के लिए परियोजनाओं को भेज देते हैं।