नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरेशी । राज्य की महायुति सरकार गजब की है। एक तरफ राज्य में किसान बाढ़ जैसी आपदा से त्रस्त हैं। उनके पास खाने, पहनने और रहने की व्यवस्था बिल्कुल नहीं है। उधर, शिक्षा व्यवस्था की हालत भी खराब है। लाडली बहनों के चलते सरकार पिछड़े वर्ग के गरीब छात्रों के वजीफे की रकम भी उन्हें नहीं दे पा रही है।
वेतनभोगी कर्मचारीयों के वेतन समय पर नहीं हो रहे हैं।लेकिन चमकने का शौक इतना है कि विज्ञापनों के लिए 58 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। सरकार के इस कारनामे को लेकर विपक्ष भी हमलावर है।
करोड़ों की फिजूलखर्ची पर गायकवाड का हमला
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने कहा कि राज्य पर 9 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार के पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, लाडली बहनों को देने के लिए पैसे नहीं हैं, संजय गांधी निराधार योजना के लिए पैसे नहीं हैं, ठेकेदारों के बिल बकाया हैं और सरकार फिर भी विज्ञापनबाजी पर फिजूलखर्ची कर रही है।
बता दें कि सामाजिक न्याय विभाग की प्रसिद्धि के लिए राज्य सरकार ने 58 करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी है। राज्य के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिल रही। इस विभाग का फंड गैरकानूनी तरीके से दूसरे विभागों की ओर मोड़कर दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। ऐसे समय में इस विभाग को प्रसिद्धि की क्या जरूरत है? ऐसा सवाल उठने लगा है। लोगों का कहना है कि पहले जिनके लिए यह पैसा है, उन्हीं पर खर्च करना चाहिए।