नागपुर । अब्दुल अमानी कुरैशी । मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी की बार काउंसिल को जूनियर वकीलों को नियुक्त करने के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड तय करने का सुझाव दिया, जिससे उनकी आजीविका की रक्षा हो सके। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन ने कहा कि अक्सर युवा वकील अपने सीनियर वकीलों से कम भुगतान के कारण अपना जीवन यापन करने में असमर्थ होते हैं। न्यायालय ने कहा कि सीनियर वकील, जो जूनियर वकीलों को न्यूनतम स्टाइपेंड दिए बिना उनसे काम लेते हैं, वास्तव में युवा वकीलों का शोषण कर रहे हैं और सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसकी न्यायालय अनुमति नहीं दे सकता।
जांच अधिकारी से निष्पक्ष तरीके से जांच करने और शिकायत की वास्तविकता का पता लगाने की अपेक्षा की जाती है: मद्रास हाइकोर्ट न्यायालय ने कहा, "बिना भुगतान के काम लेना शोषण है और सीधे तौर पर संविधान के तहत निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इन युवा प्रतिभाशाली वकीलों की आजीविका, जिन्होंने उम्मीद के साथ अपनी प्रैक्टिस शुरू की है, उसको सीनियर वकीलों, कानूनी बिरादरी और न्यायालयों द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
" न्यायालय ने कहा कि राज्य बार काउंसिल का कार्य उन वकीलों के अधिकारों, विशेषाधिकारों, हितों और आजीविका की रक्षा करना है, जिन्होंने बड़ी महत्वाकांक्षाओं के साथ नामांकन कराया है। न्यायालय ने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में युवा वकीलों के शोषण की अनुमति नहीं दे सकता। इसलिए राज्य को न्यूनतम वजीफा तय करने का निर्देश दिया ।