नई दिल्ली /नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरैशी।
देश में आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदलने के लिए एक जुलाई से तीन नए कानून लागू होंगे। ये तीन कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम हैं। तीनों कानूनों को पिछले साल 21 सितंबर 2023 को संसद से मंजूरी मिली थी। उसके बाद 25 दिसंबर को राष्टपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उन्हें मंजूरी दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से तीन अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। इनके मुताबिक नए कानूनों के प्रावधान एक जुलाई से लागू होंगे।

महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध
भारतीय न्याय संहिता ने यौन अपराधों से निपटने के लिए महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध नामक एक नया अध्याय पेश किया है। कानून में नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले को पॉक्सो के साथ सुसंगत किया गया है और ऐसे अपराधों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। सामूहिक दुष्कर्म के सभी मामलों में 20 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है। नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म को एक नए अपराध की श्रेणी में रखा गया है। धोखे से यौन संबंध बनाने या विवाह करने के सच्चे इरादे के बिना विवाह करने का वादा करने वालों पर लक्षित दंड का प्रावधान है।
संगठित अपराध
• नए कानून में संगठित अपराध से संबंधित एक नई दंड धारा जोड़ी गई है। भारतीय न्याय संहिता 111. (1) में पहली बार संगठित अपराध की व्याख्या की गई है। सिंडिकेट से की गई विधि विरुद्ध गतिविधि को दंडनीय बनाया गया है। नए प्रावधानों में सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधिया, अलगाववादी गतिविधियां अथवा भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य को जोड़ा गया है। छोटे संगठित आपराधिक कृत्यों को भी अपराध घोषित किया गया है। सात वर्ष तक की कैद हो सकती है। इससे संबंधित प्रावधान खंड 112 में हैं। आर्थिक अपराध की व्याख्या भी की गई है करेंसी नोट, बैंक नोट और सरकारी स्टांपों का हेरफेर, कोई स्कीम चलाना या किसी बैंक/वित्तीय संस्था में गड़बड़ी ऐसे कृत्य शामिल हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ।
न्याय आपराधिक कार्यवाही शुरू करने, गिरफ्तारी, जांच, आरोप पत्र, मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही, संज्ञान, आरोप तय करने, प्ली बारगेनिंग, सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति, ट्रायल, जमानत, फैसला और सजा, दया याचिका आदि के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई है। 35 धाराओं में समय-सीमा जोड़ी गई है, जिससे तेज गति से न्याय प्रदान करना संभव होगा।