श्रीगंगानगर। न्यूज डेस्क । एक तरफ आज़ादी का उत्सव,लड्डू बंट रहे थे मिठाईयां बांट रहे थे,रंग गुलाल उड़ रहे थे राजसत्ता का आनंद लेने के लिए हसीन स्वप्न संजोए जा रहे थे दूसरी तरफ विशेषकर सिख कौम व पंजाबी अपने कंधों पर अपने ही परिवार की लाशें उठाकर, वहशी दरिंदो द्वारा कोह कोह कर बलात्कार का शिकार हुई अपनी ही बहनों को जिल्लत की अंधेरी खाई में गिरते देख रहे थे।
घर बार, ज़मीन, जायदाद, पशु सभी कुछ छोडछाडकर लुटी पिटी हालत में पाकिस्तान से नाता तोड़ हवेलियों में रहने वाले शरणार्थी कैंपो में रहने लगे थे।ये दर्द ये पीड़ा ये संताप जो सिख कौम और पंजाबियों ने अपने शरीर पर बिताया है। *आज भी जब आज़ादी का पर्व आता है तो दर्द और पीड़ा साथ साथ आती है* क्योंकि देश की आज़ादी में सबसे ज्यादा कुर्बानी करने वाली कौम ने सबसे ज्यादा दुख भोगे।
आज श्री अकाल तख्त साहिब ओर उन लाखों लोग जो आज़ादी के पर्व पर सरकार की घिनौनी नीतियों का शिकार हो मौत के आगोश में समा गए उनके नमित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। *इतने लंबे समय बाद एक सकूं का अहसास हुआ जब हिन्दू व मुसलमान भाईचारे ने भी श्री अकाल तख्त साहिब आ अफ़सोस जताया*।
यह एक नेक और बेहतरीन प्रयास है कौमी भाईचारे के लिए।अपने कौमी फ़र्ज़ के तहत राजस्थान की सिख जत्थेबंदियों में बीबी हरमीत कौर खालसा गोलूवाला, शिवचरण सिंह बगुलेयांवाला ,स्वर्ण सिंह फोजी ,बाबा गगनदीप सिंह करतार फाउंडेशन , गुरजीत सिंह मोरजंड ,निहाल सिंह ,बलदेव सिंह जगसीर सिंह ,गोपी सिंह, गुरबीर सिंह12जी ,अंग्रेज सिंह गोलूवाला, नब सिंह खरलीयां, जसवीर सिंह काला,नब सिंह गोलूवाला, जोरावर सिंह गंगानगर, गुरदीप सिंह जयसिंहपुर, गुरदीत सिंह कालियां, संदीप सिंह गंगानगर निशांन सिंह हरमंदर सिंह, जसकरण सिंह, सुखप्रीत सिंह, मनप्रीत सिंह, निरंजन सिंह सिद्धू ने शमूलियत की ।