मुंबई | न्यूज़ डेस्क | पाकिस्तान में चल रहा सियासी संकट अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच चुका है। इमरान सरकार के खिलाफ सोमवार को पाकिस्तान नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश हो गया। गुरुवार को इस पर बहस होगी। इसके बाद होने वाली वोटिंग से तय हो जाएगा कि इमरान सरकार रहेगी या गिर जाएगी।
आखिर इमरान सरकार के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव कौन-कौन सी पार्टियां लाई हैं? अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया है? इस संकट में पाकिस्तानी सेना का क्या रुख है? पाकिस्तानी संसद का गणित किसके पक्ष में है? इस संटक का नतीजा कब तक सामने आएगा? इमरान की सरकार गई तो आगे क्या हो सकता है?
पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों की ओर से सोमवार को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 31 मार्च को इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। चर्चा के बाद इस पर वोटिंग होगी। पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद अहमद ने रविवार को मीडिया से कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर चार अप्रैल को वोटिंग हो सकती है।
हालांकि, विपक्ष स्पीकर पर पक्षपात करने करने का आरोप लगा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर इमरान सरकार को बहुमत जुटाने के लिए समय देने की कोशिश कर रहे हैं। नियम के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के तीन से सात दिन के भीतर वोटिंग कराया जाना अनिवार्य है।
अगर इमरान के खिलाफ लाया गया ये अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाता है तो इमरान सत्ता से बेदखल हो जाएंगे। इसके साथ ही पाकिस्तानी के संसदीय इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री के कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने का रिकॉर्ड बरकरार रहेगा।
कौन सी पार्टियां ये प्रस्ताव लाई हैं?
इमरान के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव संयुक्त विपक्ष लेकर आया है। इसमें शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग, नवाज (पीएमएलएन), बिलावल भुट्टो की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) जैसी पार्टियां शामिल हैं। कभी एक-दूसरे की धुर विरोधी रहीं दोनों पार्टियां इमरान सरकार को गिराने के लिए एक साथ हो गई हैं। इमरान ने कई छोटे दलों को साथ लेकर सरकार बनाई थी। इनमें से भी कुछ विपक्षी खेमे जा चुकी हैं।
इमरान 2018 में सत्ता में आए थे। उनके पास बहुमत के लिए जरूरी 172 सीटों से ज्यादा का आंकड़ा था। इसके साथ ही उन्हें कुछ अन्य छोटे दलों का भी समर्थन था। उस वक्त विपक्ष बिखरा हुआ था। विपक्ष के ज्यादातर नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले चल रहे थे। पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था चरमराई हुई थी। जिसे बेहतर करने का वादा करके इमरान सत्ता में आए थे। हालांकि, वो इसे पटरी पर लाने में नाकाम रहे।
इमरान पर अर्थव्यवस्था और देश की विदेश नीति को सही तरह से नहीं चला पाने के आरोप हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से इमरान ने चार वित्त मंत्री बदले, करीब एक दर्जन वित्त सचिव बदले गए। यहां तक की उन्होंने अपने कर प्रमुख तक को बदला। इसके बाद भी अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल और बिजली की कीमतों में हुई भारी वृद्धि ने इमरान की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
पाकिस्तान की सरकार चलाने में तो सेना का अहम रोल रहता है उसका क्या?
2018 में जब इमरान सत्ता में आए तब सेना का उन्हें पूरा समर्थन मिला हुआ था। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसके पहले जब भी इमरान के सत्ता से बेदखल करने की कोशिश हुई उसे सेना की मदद से ही नाकाम किया गया। हालांकि, इस बार हालात अलग है। इमरान के ऊपर बढ़ते दबाव के बीच सेना ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। सेना में इमरान से समर्थक अधिकारियों की संख्या भी काफी कम हो गई है। बीते साल अक्टूबर में इमरान के करीबी आईएसआई प्रमुख जनरल फैज हमीद को हटा दिया गया। इसके बाद सेना के साथ इमरान के संबंध कमजोर हुए हैं। सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से भी इमरान के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं।