मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है | इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने के बाद हवन किया जाता है | नौवें दिन नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है | हिंदू धर्म में इसका बड़ा महत्व बताया गया है | इस दिन 10 साल से कम उम्र की कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है |
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है | मां का ये स्वरूप भक्तों को सिद्धि प्रदान करता है | नवमी तिथि को घटस्थापना की तिथि यानी नवरात्रि के पहले दिन की तरह ही महत्वपूर्ण माना जाता है | नवमी के दिन मां को प्रसन्न करने के लिए विधिवत तरीके से पूजा अर्चना की जाती है | नवमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है |
नवरात्रि के नौवें दिन नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है | हिंदू धर्म में इसका बड़ा महत्व बताया गया है. इस दिन 10 साल से कम उम्र की कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है | नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में कन्या पूजन के बाद ही भक्तों के नवरात्र व्रत संपन्न माने जाते हैं |
इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी 14 अक्टूबर को पड़ी है | ये नवरात्रि पूजा का आखिरी दिन होता है | कुछ लोग मां दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए नौ दिन उपवास रखते हैं | तो कुछ पहले और आखिरी दिन व्रत रखकर मां की उपासना करते हैं | कहते हैं कि मां दुर्गा के ये व्रत संपन्न तभी माने जाते हैं |
जब कन्या पूजन किया जाता है | देवी की तरह इन कन्याओं की पूजा की जाती है | इन्हें भोग लगाकर, पैर छुए जाते हैं और सामर्थ्य अनुसार, गिफ्ट आदि देकर विदा किया जाता है | आइए जानते हैं कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और इसकी विधि |
नवमी तिथि 13 अक्टूबर रात 8 बजकर 7 मिनट से लेकर 14 अक्टूबर शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी | इस बार नवमी तिथि 14 अक्टूबर के दिन मनाई जाएगी | भक्त गुरुवार के दिन कन्या पूजन कर अपने नवरात्रि के व्रत संपन्न करेंगे |
कन्या पूजन का मुहूर्त
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारंभ 13 अक्टूबर दिन बुधवार की रात 08:07 बजे से हो गया है |
इसका समापन 14 अक्टूबर दिन गुरुवार शाम 06:52 बजे हो रहा है |
महानवमी के दिन रवि योग रवि प्रात: 9:36 बजे से प्रारंभ है, जो 15 अक्टूबर को सुबह 06:22 बजे तक है |
ऐसे में आप सुबह में मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद कन्या पूजन कर सकते हैं |
इसके अतिरिक्त अमृत काल और ब्रह्म मुहूर्त में भी पूजन करना शुभ है |
कन्या पूजन का नियम
कन्या पूजा में 2-10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए |
कन्या पूजा में 9 कन्याओं को भोज कराएं और दक्षिणा देकर आशीष लें |
कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोज के लिए बैठाना चाहिए. बता दें कि बालक को बटुक भैरव का स्वरुप माना जाता है |
आप अपने सामर्थ्य के अनुसार, कन्याओं की संख्या पूजा के लिए निर्धारित कर सकते हैं. वहीं, 9 कन्याओं की पूजा की बाध्यता नहीं है |
कन्या पूजन विधि
कन्याओं का पुष्प वर्षा से स्वागत करें
नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं |
इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठायें |
सभी के पैरों को दूध या फिर जल से भरी थाली में रखकर अपने हाथों से धुलाएं |
इसके बाद पैर छूकर आशीष लें |
कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाएं |
मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार, भोजन कराएं |
भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य के अनुसार, दक्षिणा, उपहार दें |
कन्या पूजन के लिए हलवा पूड़ी और चने प्रसाद के रूप में बनाए जाते हैं |
कन्या पूजन
10 वर्ष की कन्या सुभद्रा |
9 वर्ष की कन्या दुर्गा |
8 वर्ष की कन्या शाम्भवी |
7 वर्ष की कन्या चंडिका |
6 वर्ष की कन्या कालिका |
5 वर्ष की कन्या रोहिणी |
4 वर्ष की कन्या कल्याणी |
3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति |
2 वर्ष की कन्या कुंआरी |