मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | हिन्दू धर्म में नवरात्रि का और नवरात्रि में कन्या पूजन यानी कंजक खिलाने का विशेष महत्त्व है| वैसे तो कन्या पूजन नवरात्रि के किसी भी दिन किया जा सकता है| लेकिन इसके लिए अष्टमी और नवमी तिथि को श्रेष्ठ दिन माना जाता है|
इन दिनों वह लोग तो विशेष तौर पर कन्या पूजन करते ही हैं, जो नवरात्रि के सभी दिनों में मां की आराधना और व्रत करते हैं| लेकिन कन्या पूजन करना वह लोग भी चाहते हैं, जो केवल नवरात्रि के पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं या किसी कारणवश व्रत नहीं भी रखते हैं| क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मां की पूजा कन्या पूजन के बाद ही सफल मानी जाती है|
अगर आप चाहते हैं कि आपको नवरात्रि पूजा का भरपूर लाभ मिले, तो कन्या पूजन के समय कुछ बातों का ध्यान आपको जरूर रखना चाहिए| आइये जानते हैं कन्या पूजन का क्या महत्त्व है और कंजक खिलाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है|
कन्या पूजन का महत्त्व
माता रानी का स्वरूप माने जाने वाली कन्याओं की पूजा के बिना नवरात्रि के नौ दिन की शक्ति पूजा अधूरी मानी जाती है| देवी मां पूजा-पाठ, हवन, तप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होती हैं जितनी कन्या पूजन से होती हैं| इसलिए नवरात्रि के दिनों में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व है|
कन्या पूजन के समय इन बातों का रखें ध्यान
कन्या पूजन करने से पहले उस स्थान की साफ़-सफाई अच्छी तरह से जरूर कर लें, जहां कन्या पूजन किया जाना है|
कन्या पूजन यानी कंजक खिलाते समय उनके साथ एक बालक को जरूर बिठाएं| कन्याओं की तरह उस बालक जिसे लंगूर बोला जाता है का पूजन भी जरूर करें और उसको भोजन भी करवाएं| बालक को बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है| देवी मां की पूजा के बाद भैरव की पूजा बेहद अहम मानी जाती है|
कन्या पूजन में केवल 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु तक की कन्याओं को ही आमंत्रित करें|
पूजा के लिए बिठाने से पहले कन्याओं के पैर दूध और पानी से आप खुद ही धोएं तो बेहतर होगा|
कन्याओं और बालक को बिठाकर उनकी श्रद्धा-भाव से पूजा करें और उनको भोजन परोसें|
कन्या पूजन में वैसे तो अपने सामर्थ्य के अनुसार आप कुछ भी सात्विक भोजन करवा सकते हैं| लेकिन उनको खीर, पूड़ी, हल्वा, चना, नारियल, दही, जलेबी जैसी चीजों का भोग लगाना पारम्परिक माना जाता है|
भोजन करवाने के बाद कन्याओं और बालक को कुछ न कुछ उपहार जरूर दें| उपहार का चुनाव आप अपने सामार्थ्य के अनुसार कर सकते हैं|
आखिर में कन्याओं और बालक के पैर छूकर उनका आशीर्वाद ज़रूर लें|