मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | आज नवरात्रि की षष्ठी तिथि है। आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। नवरात्रि 9 दिनों तक चलती है। इस पर्व की अष्टमी और नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन किया जाता है। हिंदू धर्म में कन्या पूजन का महत्व बेहद अत्याधिक है। दरअसल, छोटी कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता है।
ऐसे में अष्टमी व नवमी तिथि के दिन तीन से नौ वर्ष की कन्याओं का पूजन किए जाने का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, 3 से लेकर 9 वर्ष तक की कन्याओं को मां का साक्षात स्वरूप माना जाता है। तो आइए जानते हैं कन्या पूजन का महत्व क्या है और इस दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।
नवमी में 9 कन्याओं को पूजने का महत्व:
नवमी के दिन 9 कन्याओं को पूजा जाता है तो एक कन्या को पूजने का मतलब ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार से राज्यपद, पांच से विद्या, छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि, सात से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
दक्षिणा है बेहद जरूरी:
नवरात्रि में कन्या पूजन करने के बाद कन्याओं को प्रसाद खिलाना चाहिए। साथ ही दक्षिणा भी देनी चाहिए। यह बेहद अहम होता है। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।