मुंबई | ऋषि भट्ट | जब 1990 के दशक में इंटरनेट के आया ही था, तभी से भविष्यवाणियां की जाने लगी थीं कि दुनिया में 120 सालों तक संचार की जीवन रेखा बना रहा डाक व्यवस्था खत्म हो जाएगी| संचार की जीवनरेखा का स्थान इंटरनेट ने ले लिया| डाक व्यवस्था खत्म तो नहीं हुई लेकिन उसे पनर्स्थापित करने की आवश्यकता जरूर है| उसकी भूमिकाओं में कुछ आमूल चूल बदलाव देखने को भी मिले हैं, पर उसका महत्व कम नहीं हुआ है| लोगों को इसके बारे में जानने की बहुत जरूरत है. 9 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व डाक दिवस मनाया जा रहा है|
भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह
विश्व पोस्ट दिवस के साथ भारत में भी 9 से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जा रहा है| इनका उद्देश्य लोगों में डाक सेवाओं और उनके महत्व के प्रति जागरुकता फैलाना है जिससे लोग इन सेवाओं के कार्यों में लगे लोगों की अहमियत को जान सकें जो दुनिया भर में दिन रात लोगों को जोड़ने में लगे रहते हैं|
विश्व डाक दिवस को हर साल 9 अक्टूबर को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के स्थापना दिवस की वर्षगांठ के अवसर पर मनाया जाता है| यूपीयू की स्थापना साल 1874 को स्विट्जरलैंड में स्थापित किया गया था| जिसके बाद से डाक सेवाएं बहुत से देशों के लिए पूरी दुनिया में कार्यरत हैं|
आज पोस्टल सेवाओं में व्यक्तिगत खतों और अहम दस्तावेजों के अलावा ई कॉमर्स और ऑनलाइन शॉपिंग पैकेज डिलिवरी सिस्टम शामिल हो चुके हैं| इंटरनेट के आने से इन सेवाओं का स्वरूप बहुत बदल चुका है जो एक समय में प्रमुख रूप से खतों और दस्तावेजों के पहुंचाने की सेवा के तौर पर ही जाने जाते थे
आज भले ही लोग डिजिटाइजेशन के कारण अपने सामान भेजने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने लगे हों, लेकिन पोस्टल सेवाओं की अहमियत समाज में आज भी उतनी ही है जितनी पहले थी| इसका स्वरूप बिलकुल बदल गया है| उसका नया रूप ई पोस्ट ने ले लिया है| कभी केवल सरकार के प्राधिकार वाली सेवाओं में निजी क्षेत्र ने भी तेजी से जगह बनाई है|
इस दिवस की स्थापना में भारत की भी भूमिका है| दरअसल 1969 में यूपीयू कांग्रेस ने जापान के टोक्यो में सबसे पहले विश्व डाक दिवस को मनाया था| इसका प्रस्ताव भारतीय दल के एक सदस्य श्री आनंद मोहन नरूला ने दिया था और उसके बाद से यह हर साल 9 अक्टूबर को मनाया जाने लगा जिससे लोगों को डाक सेवाओं की अहमियत का पता चल सके|
इस मौके पर दुनिया भर में यूपीयू की 192 सदस्य देश विश्व डाक दिवस तो वैश्विक मेल यानि डाक के महत्व को रेखांकित किया जाता है| इस अवसर पर यह भी बताया जाता है कि यूपीयू का समाज और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव है| इस दिन विशेष डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित की जाती है और नए डाक नवाचारों का ऐलान भी किया जाता है|
साल 2021 में विश्व डाक दिवस के मौक पर थीम रखी गई है, ‘इनोवेट टू रिकवर’ यानि ‘बहाली के लिए नया परिवर्तन लाएं’| इसमें इस बात का वचन लेने की बात कही गई है कि आज डाक व्यवस्था को सुधारने के साथ बचाने के लिए प्रयास किए जाएं| जो आज की जरूरत है| जहां सबकुछ डिजिटल होता जा रहा है, यूपीयू ने सभी से निवेदन किया है कि वे डाक सेवाओं को बहाल करने में मदद करें और उसे बचाने के लिए बेहतर नए विचार दें|