नई दिल्ली | आकांशा त्रिपाठी | पितृ पक्ष के दिनों में पितरों का श्राद्ध व तर्पण किये जाने की परम्परा है| पंद्रह दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष का समापन पितृ अमावस्या के दिन किया जाता है| इस वर्ष पितृ अमावस्या 6 अक्टूबर को बुधवार के दिन है| पितृ अमावस्या के इस दिन को सर्वपितरी श्राद्ध और पितृ विसर्जन का दिन भी कहा जाता है| मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दिनों में धरती लोक पर आये पितरों को इस दिन विदाई दी जाती है|
कहा जाता है कि पितृ अमावस्या के दिन पितर वापस अपने लोक लौट जाते हैं| उनकी विदाई के इस दिन पितरों से आशीर्वाद मांग कर उनको सम्मान के साथ विदा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है| आइये जानते हैं कि पितृ अमावस्या के दिन किन लोगों का श्राद्ध व तर्पण किया जाता है और पितरों को विदाई किस तरह से दी जाती है|
पितृ अमावस्या के इस दिन उन सभी लोगों का श्राद्ध व तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या के दिन हुई हो| इसके साथ ही उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जाता है जिनके मृत्यु की तिथि किसी कारणवश याद नहीं होती है या किसी को पता ही नहीं होती है| अमावस्या के दिन आप उन लोगों का श्राद्ध भी कर सकते हैं जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष के बाकी दिनों में किसी वजह से करना रह गया हो|
पितृ अमावस्या यानी पितृ विसर्जन के दिन आपको सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना चाहिए| साफ कपड़े पहन कर अपने पितरों का श्राद्ध करना चाहिए. इस दिन घर की महिलाओं को नहा-धोकर भोजन पकाना चाहिए|
साथ ही आपको ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिए और और पंचबलि भोग के तहत देव, गाय, कौआ, कुत्ता और चीटियों के लिए भोग निकालना चाहिए| अगर अमावस्या के दिन आप किसी का श्राद्ध नहीं भी कर रहे हैं| तो भी आपको उस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए|
इस दिन पितरों को विदाई देने के लिए आपको शाम के समय मिट्टी के चार दीपक लेकर उनमें सरसों का तेल डालकर जलाएं और इन सभी को घर की चौखट पर रख दें| इसके बाद आप एक दीपक प्लेट में लें और एक लोटे में जल लेकर अपने पितरों से प्रार्थना करें कि पितृ पक्ष का समापन हो गया है| आप घर के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक को वापस चले जाएं|