February 07, 2026

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"सुई का चयन" : डॉ. अशोक कुमार वर्मा




सूई का चयन

संवेदनशील है जीवन में सुई का चयन,

युवाओं के हाथों में है जीवन–मरण।

एक छोटी-सी सुई तय कर देती है,

उत्थान मिलेगा या घोर पतन।

सुई का चयन संभल कर हे तरुणाई,

सद्गति और दुर्गति दोनों इसमें समाई।

एक ही धार पर हैं दो राहें,

एक उठाए तो दूजी गिराए।

एक सुई है जो करती है मद में चूर,

छल, कपट और द्वेष से सदा भरपूर।

हँसते-खेलते चेहरे बुझने लगते,

भविष्य हो जाता है मजबूर।

धीरे-धीरे, चुपके-चुपके,

टूट जाते हैं सारे सपने।

मित्र, संबंधी, अपने-पराए,

सब हो जाते हैं अनजाने अपने।

एकाकीपन, तनाव और अवसाद,

फिर जन्म लेता है अपराध।

सूई नशे की ले जाती है,

मानव को मानवता से दूर।

पर एक सुई है जो जीवन रचती,

अंतर्मन को पुलकित करती।

रक्तदान की सुई कहलाती।

टूटती साँसों की डोरी जुड़ जाती।

आशीषों का मिलता धन ,

न कोई मोल न कोई तोल।

राष्ट्र भक्ति का मधुर रस,

जब चाहे तब जीवन में घोल।

चुनाव तेरा है ओ युवा आज,

विनाश की सुई या जीवन का काज।

नशे को ठुकरा, रक्त को अपना,

यही सच्ची तरुणाई की आवाज़।




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