नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरेशी। प्रधानमंत्रीउच्चतर शिक्षा अभियान पीएम-(उषा) के तहत क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स पर तीन दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया।
प्रारंभ में सायकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुबोध बनसोड ने डॉ प्रदीप पाटील का स्वागत किया। तत्पश्चात कार्यशाला के प्रथम वक्ता के रुप मे दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ एचईआर रिसर्च, मनोरोग विभाग नागपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप पाटिल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि,मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मनोचिकित्सक की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि मरीज के प्रति सहानुभूति, गोपनीयता और सम्मान का पालन करना उनका सबसे बड़ा दायित्व होता है।
एक मनोचिकित्सक को बिना किसी भेदभाव के मरीज की बात ध्यान से सुननी चाहिए, उसके मानसिक संघर्ष को समझना चाहिए और उसे सुरक्षित माहौल में उपचार देना चाहिए। समय पर सही परामर्श, वैज्ञानिक तरीके से इलाज, दवाओं की उचित जानकारी और भावनात्मक सहयोग से ही मरीज का आत्मविश्वास लौटाया जा सकता है। समाज में बढ़ती मानसिक चुनौतियों के बीच मनोचिकित्सक का कर्तव्य है कि वे मरीज को केवल रोगी नहीं, बल्कि एक इंसान समझकर उसके जीवन को फिर से संतुलित बनाने में मार्गदर्शक बनें।
क्रिटिकल थिंकिंग व प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स पर प्रेरणादायक व्याख्यान देते हूए डॉ प्रदीप पाटील ने विद्यार्थियों से कहा कि,आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में Critical Thinking and Problem-Solving Skills सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बन चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सोचने का तरीका ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। उन्होंने बताया कि सही प्रश्न पूछना और तथ्यों का विश्लेषण करना ही सच्ची समझ की पहचान है। उन्होंने उदाहरणों के ज़रिये समझाया कि हर समस्या अपने साथ सीख का अवसर लेकर आती है। घबराने के बजाय समाधान ढूँढना ही सफल व्यक्ति की पहचान है।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।क्रिटिकल थिंकिंग व प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स पर प्रेरणादायक व्याख्यान देते हूए डॉ प्रदीप पाटील ने विद्यार्थियों से कहा कि,आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में Critical Thinking and Problem-Solving Skills सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बन चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सोचने का तरीका ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। उन्होंने बताया कि सही प्रश्न पूछना और तथ्यों का विश्लेषण करना ही सच्ची समझ की पहचान है।
उन्होंने उदाहरणों के ज़रिये समझाया कि हर समस्या अपने साथ सीख का अवसर लेकर आती है। घबराने के बजाय समाधान ढूँढना ही सफल व्यक्ति की पहचान है। कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।