नागपुर । प्रा विवेक बांबल । भारत दर्शन का मतलब भीड़ का दर्शन है। नए साल की शुरुआत देश भर के धार्मिक स्थलों पर्यटन स्थलों होटलों या रेस्तरां में भीड़ की खबरों से हुई है। पिछले एक हफ्ते से देश के अलग अलग धर्मस्थलों से लोगों के जुटने की जैसी खबरें आई उनसे इस बात की पुष्टि हुई कि भारत के लोगों को ज्यादा से ज्यादा धार्मिक बनाने का भारत सरकार और भाजपा का प्रोजेक्ट सफल हुआ है। एक समय गर्व से कहो हम हिंदू हैं के नारे लगते थे लेकिन तब लोग इस पहचान को लेकर इतने सीरियस नहीं थे। आज यह नारा नहीं लगता है लेकिन लोग अपनी हिंदू पहचान को लेकर सचमुच सीरियस है और इसके प्रदर्शन का कोई मौका नहीं छोड़ते है। इसी वजह से कर्मकांड का वह दौर लौट आया है, जिसे भारत पीछे छोड़ चुका था।
नए साल में और आने वाले कई सालों में इसी वजह से हर जगह भीड़ बढ़ेगी। मंदिरों में भीड़ बढ़ेगी, कथावाचकों के प्रवचनों में भीड़ बढ़ेगी तो ज्योतिष और कर्मकांड करने वालों की भीड़ भी बढ़ती जाएगी। नेताओं की सभाओं में भीड़ बढ़ेगी तो फिल्मी सितारों को देखने के लिए भी भीड़ उमड़ेगी। दुनिया भर के कलाकार भारत में शो करने या कन्सर्ट के लिए आ रहे है क्योंकि भारत के पास 140 करोड़ की भीड़ है। 2025 को विदाई देने के लिए जितने भी कार्यक्रम हुए सबमें भीड़ उमड़ी।
नए साल के मौके पर खबर है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों पर लाखों लोगों की भीड़ जुटी। अयोध्या में साल के पहले दिन पांच लाख लोगों ने रामलला के दर्शन किए। पिछले एक हफ्ते में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने अयोध्या में दर्शन किए। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एक जनवरी, गुरुवार को शाम तक पांच लाख लोग दर्शन कर चुके थे और भीड़ देख कर मंदिर प्रशासन ने लोगों से पांच जनवरी तक वृंदावन नहीं आने की अपील की है। उधर उज्जैन के महाकाल मंदिर भी श्रद्धालुओं की भीड़ 31 दिसंबर की आधी रात से ही लाइन में खड़ी थी। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन बंद करना पड़ा।
राजस्थान के सीकर में खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए देश भर के लोग पहुंचे। करीब छह लाख लोग 15 से 17 किलोमीटर तक पैदल चले और दर्शन किया। इसी तरह चितौड़गढ़ में सावलिया सेठ के दर्शन के लिए लाखों लोग जुटे। भीड़ देख कर मंदिर प्रशासन को भगवान के सोने और शृंगार के समय में कटौती करनी पड़ी और 15 घंटे में करीब पांच लाख लोगों ने दर्शन किए। चुरू के सालासर बालाजी के मंदिर में 31 दिसंबर को आधी रात के बाद दर्शन शुरू हो गए और एक जनवरी के डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन किए। गुजरात में सोमनाथ से लेकर द्वारका और बनासकांठा में अंबाजी मंदिर तक और उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर झारखंड के देवघर मंदिर तक भक्तों की कतार लगी रही। दिल्ली के कालकाजी और झंडेवालान मंदिर में भी भक्तों की भीड़ ने नए रिकॉर्ड बनाए।
अगर मुस्लिम पक्ष की बात की जाए तो सर्वधर्म समभाव के प्रतीक माने जाने वाले हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर दरगाह में भीड़ पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी बढ़ी थी, और होटल कम पड़ गए, इसलिए स्थानीय लोगों ने अपने घर श्रद्धालुओं के लिए गेस्टहाउस की तरह खोले।
उसमे 2025 के अजमेर उर्स में लाखों लोग शामिल हुए और इसे पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भीड़ वाला आयोजन माना गया। लगभग 10 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु उर्स की रस्मों और प्रार्थनाओं में शामिल हुए और बड़ी चादरें रोजाना चालीस से पचास हजार चढ़ाई गयी ।
अब नागपुर शहर और आसपास में ने साल की शूरूआत के साथ ही शहर और आसपास के धार्मिक स्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और चर्चों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है जहां लोग अपने परिवार के साथ पहुंचकर नए साल की शुरुआत दुआओं और प्रार्थनाओं से कर रहे थे। प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजन, आरती और लंगर का आयोजन किया गया, वहीं सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त इंतज़ाम करने पड़ रहे है। आस्था, उम्मीद और नई शुरुआत की भावना के साथ श्रद्धालुओं ने शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बन गया।