उत्तराखंड | न्यूज़ डेस्क | उत्तराखंड के चमोली जिले की नीति घाटी में तमक गांव के पास धौली गंगा नदी पर बनी कृत्रिम झील फिर सुर्खियों में है | अगस्त की आपदा से बनी यह झील अब फैल रही जलस्तर बढ़ रहा है | स्थानीय लोग अफवाह बताते हैं, लेकिन प्रशासन एसडीआरएफ के साथ सतर्क है | विशेषज्ञ प्रो. एमपीएस बिष्ट ने 350 मीटर लंबी झील को खतरा बताया |
सर्दियों में निकासी की योजना
चमोली जिले के नीति घाटी के तमक गांव में धौली गंगा नदी पर बनी कृत्रिम झील एक बार फिर चर्चा में है | यह झील पिछले सालों की प्राकृतिक आपदाओं से बनी थी | अब यह तेजी से फैल रही है, जिससे स्थानीय लोग डर रहे हैं | लेकिन कुछ लोग इसे महज अफवाह बता रहे हैं | प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है | 
पिछली आपदा
31 अगस्त की रात को नीति घाटी के तमक में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी | भारत-चीन सीमा से जुड़ने वाला एकमात्र रास्ता बंद हो गय बॉर्डर रोड को जोड़ने वाला आरसीसी पुल पूरी तरह टूट गया | भारी मलबा तमक नाले से बहकर आया और धौली गंगा में गिर गया | इससे नदी में कृत्रिम झील बन गई | तुरंत एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें पहुंचीं | उन्होंने झील का जायजा लिया और पानी निकाल दिया | अच्छी निकासी होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली | सितंबर के शुरुआती दिनों में एसडीआरएफ और जिला प्रशासन ने इसे सुरक्षित घोषित कर दिया था |
अब क्या खतरा रहा हैबढ़
अब झील फिर से सुर्खियों में है | पानी साफ हो गया है और झील विशाल रूप ले चुकी है | रंग नीला और साफ दिख रहा है. लेकिन लगातार पानी निकलने के बावजूद जल स्तर बढ़ रहा है | झील का मुहाना (निकासी का रास्ता) संकरा होने से क्षेत्रफल भी फैल रहा है |
सर्दियों में पानी कम हो जाएगा, लेकिन गर्मियों में हिमस्खलन, ग्लेशियर पिघलना और भारी बारिश से यह झील फिर से खतरनाक हो सकती है | आसपास के गांवों और सड़को सर्दियों में पानी कम हो जाएगा, लेकिन गर्मियों में हिमस्खलन, ग्लेशियर पिघलना और भारी बारिश से यह झील फिर से खतरनाक हो सकती है | आसपास के गांवों और सड़कोपर खतरा मंडरा रहा है |
स्थानीय लोगों का दावा: डरने की कोई बात नहींचंद्रशेखर वशिष्ठ ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया | तमक क्षेत्र के लोग कहते हैं कि झील बनने की खबर अफवाह है | भारी बारिश में पहाड़ से मलबा गिरा था, जिससे नदी का बहाव थोड़ा धीमा हो गया | लेकिन पानी लगातार बह रहा है और कोई बड़ा अवरोध नहीं है | स्थानीय निवासी नरेंद्र रावत, दीपक रावत, रघुवीर सिंह और हरेंद्र राणा ने बताया कि मौके पर सब सामान्य है | झील जैसा कुछ नहीं बना |
प्रशासन की सतर्कता: टीमें सक्रिय
प्रशासन किसी जोखिम को नजरअंदाज नहीं कर रहा | जिलाधिकारी गौरव कुमार ने तुरंत एसडीआरएफ की टीम और अधिकारियों को भेजा | जोशीमठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया | उन्होंने कहा कि झील बनी थी तो हमने पानी निकाला था | अब भी निगरानी जारी है | सर्दियों में पानी कम होगा, तब मुहाने को चौड़ा करेंगे | जरूरत पड़ने पर और कामकरेंगे | फिलहाल सब नियंत्रण में है | विशेषज्ञ झील की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं |
खबर कैसे फैली विशेषज्ञ की चिंता
यह हलचल हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमपीएस बिष्ट के बयान से शुरू हुई | 25 से 28 अक्टूबर के बीच उन्होंने तमक नाले के पास जाकर देखा | झील की लंबाई करीब 350 मीटर है | प्रो. बिष्ट ने बताया कि अगस्त में भारी बारिश और हिमस्खलन से 50 मीटर लंबा आरसीसी पुल बह गया | इससे नदी का बहाव रुक गया और पानी ठहरने लगा | कुछ रिसाव हो रहा है, लेकिन यह गंभीर खतरा है |
उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र का भूगर्भीय ढांचा नाजुक है. पुरानी मोरेन (मलबे की ढेरियां) आसानी से खिसक जाती हैं | नीति घाटी में भूस्खलन, बाढ़ और र हिमस्खलन आम हैं | धौली गंगा को अलकनंदा की सबसे खतरनाक नदियों में गिना जाता है | इसके इतिहास में 1970 का ढाक नाला हादसा, तपोवन, ऋषि गंगा, रैणी, जोशीमठ और तमंग जैसी कई आपदाएं हुई हैं |