नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरेशी । ग्राम पंचायत के प्रभारी रहते हुए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले सरपंच कैलाश निकोसे को आखिरकार अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रवीण माहिरे ने धारा 14 (1) (3) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया है, अतिक्रमण की शिकायत आखिरकार सच साबित हुई है।
उपसरपंच मयूर सोनोने ने 10 दिसंबर 2024 को अपर जिला मजिस्ट्रेट को राजस्व भूमि प.ह.नं. 31 पर सरपंच द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत की थी। तदोपरांत तलाठी, तहसीलदार व ग्राम पंचायत से जांच हेतु रिपोर्ट मांगी गई थी। सभी रिपोर्टों में सरपंच कैलाश निकोसे द्वारा अतिक्रमण पाया गया। अधिवक्ता ताबीर शेख और वाजेद शेख ने अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के समक्ष मजबूत तर्क प्रस्तुत किए
अतिक्रमण को लेकर ठोस सबूत वकीलों ने पेश कीये आक्रामक दलीलें देने में वे सफल रहे। और साक्ष्यों के साथ न्यायालय के समक्ष अतिक्रमण को सिद्ध भी किया।परिणामस्वरूप, आदेशानुसार सरपंच कैलाश निकोसे को उनके पद से हटा दिया गया।
इससे पहले, कैलाश निकोसे को ग्राम पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए अयोग्य घोषित कर दिया था। यह दूसरों को अयोग्य ठहराने का मामला है, जो उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
'2 प्रतिशत' मांग के कारण पहले से ही चर्चा में जलालखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के निर्माण कार्य के दौरान, सरपंच का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ जिसमें वह एक ठेकेदार से दो प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे। पत्रकारों ने इस मामले की पुलिस में शिकायत भी की। वायरल क्लिप में सरपंच को यह कहते हुए सुना जा सकता है - "पत्रकारों का मैं ध्यान रखूँगा!"
इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और नागरिकों में गहरा रोष है। नागरिकों ने कहा, "जब जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही कानून का दुरुपयोग करते हैं, तो प्रशासन को ऐसी सख्त कार्रवाई करनी ही पड़ती है।"
जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं, ज़मीन हड़पने वाले नहीं सरपंच द्वारा सरकारी ज़मीन हड़पने का प्रयास न केवल क़ानून का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान है।