रीवा। समशेर सिंह गहरवार। शहर का प्रतिष्ठा प्राप्त मार्तंड नंबर 3 की इन दिनों हर व्यवस्थाएं पटरी से उतर चुकी है। वजह है कि यहां के प्राचार्य को सीईओ व डीपीसी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। जिसके चलते वह ढंग से कहीं पर भी सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। जिसका खामियाजा स्कूल में छात्रों/शिक्षकों। डीपीसी एवं बीईओ ऑफिस से संबंधित कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि मार्तंड क्रमांक 3 स्कूल की शैक्षणिक सहित अन्य व्यवस्थाएं भी हद तक सुधर चुकी थी। लेकिन जब से यहां के प्राचार्य को डीपीसी व बीईओ का अतिरिक्त प्रभार सोपा गया तब से स्कूल की व्यवस्थाएं धीरे-धीरे चौपट होती जा रही है। क्योंकि प्राचार्य विहीन स्कूल में शिक्षकों के स्कूल आने का समय निर्धारित रह पाया और नहीं जाने का। पता चला है कि स्कूल के इस तरह हालत हो चुके हैं कि कोई भी शिक्षक छात्रों को पढ़ने तक को तैयार नहीं। सुना गया है कि बस, स्कूल आए और स्टाफ रूम में बैठकर गपशप करते रहे और जब मन आया घर की ओर रवाना हो गए? पता चला है कि स्कूल में शैक्षणिक व्यवस्थाओं के अलावा भी खेल कूद प्रैक्टिकल वर्क साफ सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। क्योंकि प्राचार्य अफसर शाही प्रभार के चलते स्कूल की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि अगर कर्मचारी व अधिकारी एक ही कार्य को ठीक ढंग से करें तो पूरा समय एक बीत जाता है अतिरिक्त के लिए समय ही नहीं बचता। वही दूसरे भी अधिकारी कर्मचारी ऐसे हैं कि प्रभार के बोझ तले दबने से परहेज नहीं कर रहे हैं। क्योंकि उनमे साहब सुनने की इच्छा प्रबल हो चुकी है चाहे कार्य हो या ना हो। हालांकि जिला शिक्षा विभाग में ऐसे ऐसे भी सीनियर कर्मचारी है जो कार्य के प्रति वफादार होते हुए समय के पाबंद है लेकिन उनकी राजनेताओं के पास पहुंचना होने के चलते लूप लाइन में पड़े हैं। जबकि कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों को जिम्मेदारी वाले पदों का प्रभार प्रदान किए जाएं तो हद तक अब व्यवस्थाएं रुक सकती है। वही कार्य के लिए कर्मचारी अधिकारी भी परेशान नहीं होंगे।
डीपीसी व बीईओ ऑफिस का भी हाल
बेहाल , कर्मचारी परेशान मार्तंड क्रमांक 3 स्कूल प्राचार्य राम लल्लू दीपंकर को डीपीसी व बीईओ का अतिरिक्त प्रभार मिलने पर उन्हें स्कूल का कार्य तो इन दिनों पसंद ही नहीं आ रहा। क्योंकि उनका ध्यान ओहदेदार पद तक ही सीमित होकर रह गया है? स्कूल की तर्ज पर उक्त दोनों कार्यालय की भी व्यवस्था चौपट हो चुकी है। बताया गया है कि कार्य के सिलसिले में आने वाले कर्मचारियों के लिए प्रभारी डीपीसी /बीईओ सर दर्द साबित हो रहे हैं? सुना गया है कि कर्मचारी जब ऑफिस आते हैं तो प्रभारी महोदय का पत्ता ही नहीं चल पाता। सुना गया है कि अगर कोई कर्म चारी कार्य के सिलसिले में बीईओ ऑफिस जाते हैं तो साहब के न मिलने की स्थिति में कोई अगर फोन लगाता है तो साहब का जवाब होता है कि अभी हम डीपीसी ऑफिस में बिजी है। वही जब कोई कर्मचारी कार्य के लिए डीपीसी आफिस जाते हैं तो न मिलने की स्थिति में साहब दीपांकर को फोन लगाते हैं तो उनका जवाब होता है कि अभी हमें समय लगेगा हम बीईओ ऑफिस में बिजी हैं । वहीं अगर स्कूल से फोन गया तो ठीक इसी तरह का जवाब स्कूल स्टाफ के लिए भी साहब का होता है। जवाब तो साहब ने रटा रटाया दे दिया। लेकिन सुना गया है कि वह स्कूल सहित दोनों कार्यालय से भी कन्नी काटते हुए घर से साहब नौकरी कर रहे हैं? क्योंकि अगर साहब कार्य के लिए एक्टिव होते तो हर जगह पेंडेंसी की भरमार ना होती?