September 23, 2024

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रोचक रहा कवि सम्मेलन का आयोजन

हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं से कराया परिचित




नागपुर | एड अब्दुल अमानी कुरैशी |  साहित्य में काव्य सृजन एक ऐसी विधा है जिसमें  कवियों की लेखनी  से  निकले  शब्दों  से श्रोतागण  काव्य के विभिन्न रसों का आनंद लेते हैं।  हिंदी माता परिवार लेखन की विभिन्न विधाओं की जानकारी देने के साथ नये-नये आयोजन के माध्यम से साहित्यकारों को प्रोत्साहित भी करती है।  हिन्दी माता परिवार के संस्थापक डाक्टर परमानंद शुक्ल समय समय पर हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं से परिचित कराने के लिए आनलाईन कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। 

इसी क्रम में  एड . अब्दुलअमानी कुरैशी के संयोजन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । कवि सम्मेलन का प्रारंभ नवोदित कवि आमीश काजी ने इन पंक्तियों के साथ  अपनी रचना का पठन आरंभ किया |             

धरती की आन-बान को रखना संभाल के   

 पिछला बरस तो दे गया तोहफे कमाल के                        

ये वक्त की पुकार है अपने बच्चों को।                   

रखना है देशभक्ति के साॅचे में ढाल के।   

डाक्टर रविभालशंकर  ने  सीधे शब्दों में कहा

 सबसे सरल और सबसे न्यारी है

 हम सब को हिन्दी बहुत प्यारी है। 

हिन्दी में बसती जान हमारी है 

ये भाषा हमारी और तुम्हारी है

नरेंद्र गंधारे "एकांत" ने  कहा

राष्ट्रभाषा है हमारी, हिंदी से हो वास्ता

हिंदी भाषा से सदा, खुश हाल हो हिंदोस्ता |     

 प्रा.आरीफ काजी  जोश ने अपने खास अंदाज मे कहा     

हमेशा हिंदी  के इजहार की जरुरत है 

ये भाषा  वो है जिसे प्यार  की जरूरत  है।

 मैं हमेशा हिंदी  की सेवा में मस्त  रहता हूं 

मुझे इनाम न सत्कार की जरूरत है।    

प्रा.मजीदबेग मुगल शहजाद  ने  कटाक्ष करते हुए कहा कि,  

हिन्दी के नाम का सिर्फ डंका बजा है,

अंग्रेजी को सम्मान का ताज सजा है,

'शहज़ाद' कब मिले हिन्दी को सिहासन,

अपना देश हिन्दी को  मिली सजा है |

एडवोकेट अब्दुलअमानी कुरेशी ने कहा 

दोस्ती की जडे जो काटने  में रह गये

 वो न पहुंचे मजिल तक रास्ते में रह गये 

जंगलो में रहने वालो का बताये हाल क्या 

वो पेड की ऊचाईयो को नापने मे रह गये 

तुम जो मेरे पास थे तो हर कदम नुकसान था 

दुर हम तुम से हुए तो फायदे में रह गये 

 बेबाकी के लिए पहचाने जाने  वाले कवि  मुरली लाहोटी ने कहा

हमारा प्रेम सौहार्दपूर्ण हमेशा तुम्हारे लिए है।

एक शब्द मे समझो, अजर, अमर, अनन्त  है।।

मोहसिन आफताब केलापुरी ने अपने सहज सरल भावों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति से सबका दिल जीत लिया।      

उनके गजल के शेर थे मोहसीन आफ़ताब केलापुरी ने कहा।  

तुम हो हिंदु तो राम राम करो।                 

हो मुस्लमां तो फिर सलाम करो।       

आदमी हो  तो आदमी बनकर                   

आदमी जैसा कोई काम करो।

 शिक्षिका शमीम जकरीया ने कहा

हिन्दी है मेरे देश की भाषा देश मेरा है हिंदुस्तान

अंग्रेजी की छोड़ गुलामी हिन्दी का कर लो सम्मान

अंग्रेजी से नहीं हिन्दी से अपनी पहचान

आन बान और शान है हिन्दी 

हिन्दी है अपना स्वाभिमान

  राष्ट्रीय स्तर के ख्याती प्राप्त कवि  गोपाल व्यास सागर ने मधुर आवाज में एक कविता पढ़ी 

कितनी प्यारी बोली मेरी,                

 मीठी सुरमय तान लिए।                   

राष्ट्र भक्ति भी है हिंदी, 

उन वीरों का गुणगान लिए।

कवयित्री कविता बैस ने रचित  रचना की पंक्तियां                     

मैं सबला हूं। हां, मैं नारी हूं,

इन्द्राणी हूं, ब्रम्हाणी हूं, सन्तोषी, सावित्री हूं 

प्रकृति का सौंदर्य, श्रृष्टि की रचना हूं।

मां शारदा हूं, विद्या की देवी हूं धन की दात्री हूं।

 मोहसीन‌ मलनस "मुर्शीद ने कहा 

तेरे साथ मैं जो रहा उम्र भर

इतना यह तेरा अरमान  नही

कोई झूठा पल भर रोया है                  

 सच्चे की मिठीजुबान नहीं | 

 वरिष्ठ शायर वजीर कामील ने दिल खोलकर रचना सुनाई , जिसपर श्रोताओं ने भरपूर दाद दी।                       

सबसे सरल और न्यारी है                   

हम सब को हिन्दी बहुत प्यारी है।   

 हिन्दी में बसती जान हमारी                       

 है ये भाषा हमारी और तुम्हारी है।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि व साहित्यकार  शांतिलाल कोचर गोल्डी  ने खुब तालीया बटोरी अपनी इस गजल पर ।

क्या से क्या कह देते नई फ़स्लों को 

ये गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूंढ़ते है रातरानी में 

हर एक बात पर रुठ के चला जाता है

तेरा किरदार है बहोत अहम मेरी कहानी में                   

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए | शांतिलाल कोचर ने गोल्डी द्वारा पढ़ी गयी विर रस की  कविता ने  छंदबद्ध विभिन्न रचनाओं की प्रस्तुति करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए | शांतिलाल कोचर गोल्डी  ने  छंदबद्ध विभिन्न रचनाओं की प्रस्तुति करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया | सुप्रसिद्ध मंच संचालक एवं अधिवक्ता  इब्राहीम बख्श आजाद ने उत्तम  दर्जै  का मंच  संचालन किया। वहीं  डाक्टर अनीस बेग ने आभार किया। सत्कार समारोह मे एस आर फुटाणे, एम एस कुरैशी, एस तराले डॉक्टर अनीस बेग, एस एस गडबोरीकर शगुफ्ता नियाजी, शमीम जकरीया , विजया अनिल कडू, विजय सठी, सुरेंद्र राठी, संजय अग्रवाल, दिपक सुखवाणी कलाम खान, अबुल हसन अरविंद जैस्वाल लाला सांगाणी, मोहसीन आफताब केलापुरी, मुरली लाहोटी कविता अमिताभ बैस, नरेंद्र गंधारे "एकांत, अब्दुल कदीर बख्श, मोहसीन मलनस मुर्शिद, डाक्टर रवि भालशंकर , आमिश आरिफ काजी, शांतीलाल कोचर गोल्डी वजीर कामील, हरिशंकर जोशी प्रा आरीफ काजी" जोश प्रा. मजीद वेग मुगल "शहज़ाद", गोपाल व्यास सागर, डाक्टर, अनवर सिद्दीकी, इमरान राही, एडवोकेट असद खान, भाई अबुल हसन, वासुदेव त्रिवेदी करूण, को पुष्प, मानपत्र, ट्राफी, देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात कति सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें एक बढकर एक रचनाएं कवियों ने पेश की।




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