May 11, 2024

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किताबें और ड्रेस खरीदने में नहीं चलेगी मनमानी

निजी विद्यालयों एवं पुस्तक विक्रेताओं के लिए पारदर्शिता हेतु धारा 144 के तहत आदेश जारी




 रीवा | न्यूज डेस्क | मऊगंज जिले के शासकीय और निजी स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। जिले की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रबंधन द्वारा शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों द्वारा खरीदी जाने वाली किताबें और ड्रेस खरीदने के संबंध में गंभीर शिकायतें मिली हैं। इन पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अजय श्रीवास्तव ने ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (5) के तहत एक पक्षीय रूप से जारी किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, शिक्षण संस्था के प्राचार्य तथा प्रबंधक के विरूद्ध धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी।

 जारी आदेश के अनुसार विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल अथवा अन्य शिक्षण संस्थान पुस्तकें, ड्रेस अथवा अन्य सामग्री खरीदने के लिए किसी विशेष दुकान से बाध्य नहीं कर सकेंगे। जिले के सभी अशासकीय स्कूल जो मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल अथवा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल (सीबीएसई) अथवा आईसीएसई से संबद्ध हैं उनमें यह आदेश पूरी तरह से लागू होगा। निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल के प्रवेश प्रारंभ की तिथि, प्रक्रिया, स्कूल में उपयोग की जाने वाली पाठ्य पुस्तकों, स्टेशनरी, पठन-पाठन सामग्री, स्कूल बैग, ड्रेस, स्पोर्ट्स किट की राशि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना आवश्यक होगा। इसे स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करें।

 जारी आदेश के अनुसार निजी स्कूल उसमें प्रवेश की विवरण पुस्तिका एवं प्रवेश आवेदन पत्र प्राप्त करने के संबंध में पूरी जानकारी स्कूल के सूचना पटल और वेबसाइट में उपलब्ध कराएं। इसके लिए यदि अभिभावकों से किसी भी तरह की राशि ली जाती है तो उसका स्पष्ट उल्लेख करें। सभी निजी स्कूल केवल उन्ही पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण करें जो उसकी संबद्धता वाले बोर्ड से स्वीकृत हों। निजी स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को केवल चुने हुए दुकानदार से पुस्तकें, ड्रेस, टाई, जूते, स्टेशनरी आदि खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। इन सामग्रियों को खुले बाजार से खरीदने के लिए विद्यार्थी स्वतंत्र होंगे। स्कूल संचालक विद्यार्थी की ड्रेस को छोड़कर किसी भी पाठ्य सामग्री पर स्कूल का नाम उल्लेखित नहीं करेंगे। कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

यदि किसी विद्यार्थी के पास पुरानी किताबें उपलब्ध हैं तो उसे केवल उसकी आवश्यकता की पुस्तकें ही विक्रेता के द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही नोटबुक, कॉपी, पुस्तकों व उन पर चढ़ाए जाने वाले कवर पर विद्यालय का नाम मुद्रित नहीं किया जाएगा। कोई भी विद्यालय अधिकतम दो से अधिक यूनिफार्म निर्धारित नहीं कर सकेंगे। ब्लेजर/स्वेटर इसके अतिरिक्त होगा। विद्यालय प्रशासन द्वारा यूनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जा सकेगा कि कम से कम तीन वर्ष तक कोई परिवर्तन नहीं होगा। विद्यालय प्रशासन द्वारा वार्षिकोत्सव एवं अन्य किसी आयोजन का किसी भी प्रकार की वेशभूषा को विद्यार्थियों/पालकों को क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किए जाएंगे।

 जारी आदेश के अनुसार सभी निजी स्कूल संचालक आगामी शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से कक्षावार पुस्तकों और उनके लेखक एवं प्रकाशक के नाम तथा मूल्य सूचना पटल पर प्रदर्शित करें। विद्यार्थियों अथवा अभिभावकों द्वारा मांगे जाने पर सूची उन्हें उपलब्ध कराएं। जारी आदेश के अनुसार सभी निजी स्कूल प्रबंधक सूचना पटल पर स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख करें कि पुस्तकें, ड्रेस तथा अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने की बाध्यता नहीं है।

पुस्तकों के अतिरिक्त स्कूलों द्वारा यूनिफार्म, जूते, कॉपियाँ आदि की बिक्री का प्रयास नहीं किया जाएगा। स्कूल की स्टेशनरी, ड्रेस तथा अन्य पठन-पाठन सामग्री में स्कूल का नाम प्रिंट करवाकर दुकानों से क्रय करके अथवा किसी एक विशिष्ट दुकान से बिक्री कराना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। कलेक्टर ने सभी एसडीएम तथा जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश का कठोरता से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।



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