नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरैशी। बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में बांग्लादेश क्षेत्र के संतकबीर विद्यालय तथा इसकी शाखा लर्न विथ फन कान्वेंट मे मां सरस्वती का पूजन किया गया । विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के संचालक श्रीप्रकाश गोखले, प्रधानाचार्या आरती गोखले,रवि पराते , हरिचंद नाईक,पत्रकार एड.अब्दुलअमानी कुरैशी, रमेश पुणेकर ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन कर पुष्प अर्पित किये तत्पश्चात सभी उपस्थितगणो ने विद्यालय के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मां से मंगल कामना की। एवं श्रद्धा भाव से संतकबीर विद्यालय के संचालक प्रकाश हेडाऊ ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन अर्चन कर होम यज्ञ संपन्न कराया वहीं विद्यालय की प्रधानाचार्या ने बताया की बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आरंभ होता है. एवं धार्मिक मान्यतानुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती अवतरित हुई थी. इसलिये आज का दिन काफी शुभ माना जाता है। वसंत पंचमी विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है।
साथ ही विद्यालय के संस्थापक जगरामजी हेडाऊ ने बताया की मां सरस्वती को ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है. जो कि पुस्तकों में ज्ञान का भंडार है. मां सरस्वती ज्ञान के उसी प्रतीक को अपने हाथों में धारण करती है। तत्पश्चात विद्यालय के संचालक सदस्य प्रकाश हेडाऊ ने बताया की सरस्वती के भंडार की बड़ी अपूरब बात है ।ज्यों खरचै त्यों-त्यों बढ़े, बिन खरचै घट जात ।। सरस्वती रेन यानी ज्ञान के भंडार की एक विशेषता है, कि इसे जितना साझा किया जाए यह उतना ही बढ़ता है। इस अवसर पर गीत संगीत की बेला मे एक से बढकर एक धार्मिक गीत गाये जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था, विगत जनवरी माह में आयोजित सांस्कृतिक व क्रीड़ा स्पर्धाए ली गई थी ,उन विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।तत्पश्चात सभी को प्रसाद वितरण किया गया एवं भोजन कराया गया।।

उपरोक्त दोनों आयोजनो मे श्रीप्रकाश गोखले की भुमिका महत्वपूर्ण रही। लर्न विथ फन कान्वेंट मे भी पूरे विधि-विधान के साथ सरस्वती माता का पूजन कराया गया पूजन मे विद्यालय के स्टाफ एवं विद्यालय मे अध्ययनरत छात्र छात्राओं ने पूजन कर होम लगाया। सांस्कृतिक व क्रीड़ा में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सुरुचिपूर्ण भोज कराया गया। कार्यक्रम के सफलतार्थ आरती गोखले, ज्योती रामटेके, तृप्ति चरणजीत सिंह भामरा,प्रतिक्षा यादवराव वाकोडीकर,गिता हेडाऊ ने परिश्रम किया।