नागपुर । एड अब्दुल अमानी कुरैशी। इस सप्ताह बार्टी, सारथी और महाज्योति के माध्यम से पीएचडी फेलोशिप के लिए ली गई संयुक्त सीईटी परीक्षा में गड़बड़ी पर नाराज छात्रो ने कहा सरकार का कैसा नियोजन है। एक ही परीक्षा दो-दो बार ली जा रही है और दोनों बार गड़बड़ी की जा रही है। पालकों ने कहा, यह तो छात्रों के साथ खिलवाड़ है। विदर्भ भर के छात्रों को नागपुर में एकमात्र केंद्र दिया गया, उसमें भी पेपर की झेराक्स उपलब्ध कराई गई।
इस हालत में पेपर लीक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अब तो लोग भी बोलने लगे, आजकल अनेक परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं. हर घटना के बाद जांच समितियां बनाई जाती हैं लेकिन होता कुछ भी नहीं , मामला गंभीर होने के बाद भी सरकार का ध्यान नहीं है. तलाठी(पटवारी )की परीक्षा में भी निर्धारित अंकों से ज्यादा अंक मिले. जब विपक्ष ने सरकार से पूछा तो सबूत देने की बात कही गई. एक ओर सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल हो गया है. वहीं दूसरी ओर किसी नौकरी के लिए जब भी कोई परीक्षा ली जाती है तो इस तरह की धांधली होती है. इस तरह की घटनाएं युवाओं का मनोबल गिराती है. लगता है कि सरकार का जिम्मेदार अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं रह गया है।
यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं अधिक हो रही हैं. जिम्मेदार अधिकारियों पर जब तक सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, घटनाओं पर अंकुश नहीं लगेगा. वैसे भी पीएचडी फेलोशिप के लिए परीक्षा की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए. शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर चयन किया जाना चाहिए ।
परीक्षा लेने में सरकार के लाखों रुपय खर्च हो जाते हैं। यही रकम छात्रों को फेलोशिप के लिए दी गई तो लाभ मिलेगा. पालकगण भी कहे रहे है प्रशासन को सब समझता है । इसके बाद भी कोई गंभीरता नहीं बरत रहा है।