नागपुर । ऐडवोकेट अब्दुल अमानी कुरैशी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य सभी को भारतीय मूल्यों के अनुरूप उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। यह देश को वैश्विक ज्ञान शक्ति के रूप में स्थापित करेगा, इस आशय के विचार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को उपराजधानी में व्यक्त किए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि औपचारिक डिग्री प्राप्त करना शिक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया में निरंतर शिक्षा प्रत्येक छात्र का लक्ष्य होना चाहिए।

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय का 111वां दीक्षांत समारोह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में कविवर्य सुरेश भट सभागार में आयोजित किया गया। इस समय वे बोल रही थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल और विश्वाविद्यालय के कुलाधिपति रमेश बैस ने की। अन्य मान्यवरों में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, कुलपति डॉ.सुभाष चौधरी का समावेश रहा।
प्रौद्योगिकी हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और इसलिए सभी क्षेत्रों में परिवर्तन हो रहे हैं, इस विषय पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उचित उपयोग से देश और समाज के हित को पोषित किया जा सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग मानवता को नुकसान पहुंचा सकता है। कृत्रिमबुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग इन दिनों हमारे जीवन को आसान बना रहा है, लेकिन यह जिस प्रकार का डीपफेक बनाता है वह सामाजिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के सामने नैतिक शिक्षा का मार्ग लाभदायक है।
राष्ट्रपति ने कहा, राष्ट्रसंततुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय(रातुम) की शताब्दी प्रगति ने उच्च मानक स्थापित किए हैं और समृद्ध विरासत को विकसित करने वाले इस विश्वविद्यालय के छात्रों ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र कई क्षेत्रों में अग्रणी हैं। उनके सहयोग से विश्वविद्यालय को ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है, यह अत्यंत सराहनीय है। देश के विकास में अनुसंधान और नवोन्मेषी शिक्षा की अहम भूमिका है और यह विश्वविद्यालय अनुसंधान, नवोन्वेषी शिक्षा और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रहा है। इसका एक अच्छा उदाहरण यह है कि इस विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के नाम पर 67 से अधिक पेटेंट पंजीकृत हैं। छात्रों में स्टार्टअप कलचर को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष कक्ष बनाया गया है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि स्थानीय मुद्दों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शोध पर जोर दिया जाना चाहिए। नागपुर विश्वविद्यालय को ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए जो वैश्विक स्तर पर बदलती प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सके।
यह विश्वविद्यालय नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर है। नागपुर यूनिवर्सिटी इनोवेशन और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर के जरिए भी बेहतरीन काम कर रही है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय से डीएससी की डिग्री प्राप्त करने वाले डॉ. रामचंद्र हरिसा तुपकरी और डॉ. टीवी गेडाम सुवर्णपादक आचार्य की डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र राजश्री ज्योतिदास रामटेके को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में 129 शोधार्थियों को आचार्य उपाधि से सम्मानित किया गया। कुलाधिपति डॉ. सुभाष चौधरी ने ंपरिचयात्मक भाषण दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नागपुर की दो दिवसीय यात्रा के बाद शनिवार दोपहर 12 बजे भारतीय वायु सेना के विमान से डॉ. बाबा साहब अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई।
राष्ट्रपति नागपुर में सरकारी मेडिकल कॉलेज (मेडिकल) के अमृत महोत्सव और राष्ट्रसंत
तुकडोजी महाराज विश्वविद्यालय, नागपुर के 111 वें दीक्षांत समारोह के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।
राष्ट्रपति शुक्रवार रात नागपुर राजभवन में ठहरी थी। शनिवार सुबह सुरेश भट्ट सभागार में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के समापन के बाद वे डॉ बाबा साहब अंबेडकर नागपुर हवाई अड्डे से विशेष विमान द्वारा दिल्ली रवाना हूए।