नागपुर । अब्दुल अमानी कुरैशी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध नदी समर्थक, मार्क एंजेलो द्वारा 2005 में शुरू किया गया विश्व जल दिवस पुरे विश्व में मनाया जाता है। विश्वभर में यह आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन सभी जीवनदायिनी नदियों के अमूल्य सेवाओं पर प्रकाश डालता है और जन जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। नदियाँ सभी सभ्यताओं की जननी हैं और लगभग सभी प्राणी उन्हीं के कारण जीवित हैं।

नदियां जहां पानी उपलब्ध कराती हैं। वहीं मानव जाति, पशु जीवन और वनस्पतियों के लिए पानी का एक बड़ा स्रोत हैं, बल्कि परिवहन का भी एक आदर्श साधन हैं। इस महत्व के बावजूद मनुष्य की लापरवाही के कारण दुनिया में मीठे पानी का पारिस्थिति तंत्र सबसे अधिक खतरे में है। समय की मांग है कि हम अपनी नदियों की आवाज बनें और उनकी रक्षा कर के उन्हें लुप्त होने से बचाने के लिए आवाज उठाएँ । रेत खनन, प्रदूषण और कृषि के लिए नदी तटों का अतिक्रमण हर देश,प्रदेश में नदियों के लिए एक उभरता हुआ खतरा है और इसलिए उन्हें जीवित रखने के लिए, लोगों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है।
दुनिया की उन सभी जीवनदायिनी नदियों के प्रति आभार व्यक्त करने का समय है जिन्हें मानव हमेशा उपेक्षित करता आया है, वास्तव में नदिया अपने आप में अनगिनत विशेषताओं को समेटे हुए है अपनी जलधारा से जीवन को सदियों से लाभान्वित करती आ रही है। अतः इस विश्व नदी दिवस पर उनके महत्व को समझे। लोगों में जागरूकता लाने के लिए दिलचस्पी दिखाई जाए तथा गतिविधियां आयोजित की जाए जिसमें प्रतिभागी अपने आस-पास की नदी के बारे में अवलोकन करें और इसे तस्वीरों, वीडियो, रील, कविताओं, चित्रकला के माध्यम से प्रदर्शित करें, जिससे वास्तविक सच सामने आये।
नागपुर से सांसद और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने बहोत पहले इस बारे में पहल की थी नदियों को जोड़कर उसे परिवहन योग्य बनाने प्लानिंग की थी।।
यदी उनके पास जलसंसाधन विभाग होता, तो वे आज इसको साकार करते।
उसी तरह महापौर दयाशंकर तिवारी ने भी नदियों की स्वच्छता,सफाई, का अभियान शुरू किया था। उनका प्रयास था कि नागपुर शहर में तीन समानांतर नदियाँ बहती हैं; नाग, पिली और पोरा जो शहर के मध्य से होकर बहती हैं। उसे विकसित कर करके परिवहन के योग्य बनाना, लक्ष्य प्राप्ति के लिए सरकार और संस्थानों का सहयोग अपेक्षित था।