अनुसूचित जाति और जनजाति छात्रों के लिए नए छात्रावास बनाने का वादा तो किया गया लेकिन उस पर काम शुरू नहीं हुआ, नाराज छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं।
जबलपुर । न्यूज डेस्क । सरकार के वादों और हकीकत में क्या फर्क होता है? इसे जबलपुर के एससी-एसटी वर्ग के छात्रों की पीड़ा देखकर समझा जा सकता है। कॉलेज में पढ़ने वाले एससी-एसटी वर्ग के छात्रों का नया होस्टल बनाने के लिए जबलपुर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आठ माह पहले भूमि पूजन किया था लेकिन इसके बाद होस्टल की एक ईंट नहीं लगी और अब जर्जर हो चुके पुराने होस्टल से छात्रों को बाहर निकलने का दबाव बनाया जा रहा है। सरकार की वादाखिलाफी को लेकर छात्र 8 मई से आंदोलन कर रहे है।
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एक ही कैम्पस में मौजूद हैं सभी छात्रावास
जबलपुर के अधारताल इलाके में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के चार छात्रावास एक ही कैंपस में है। यह छात्रावास पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इसी वजह से छात्रों की मांग पर पिछले साल नया छात्रावास बनाने की मंजूरी शिवराज सरकार ने दी थी। 18 सितंबर 2022 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जबलपुर प्रवास के दौरान हॉस्टल का भूमि पूजन भी करवा दिया गया लेकिन इसके बाद सरकार हॉस्टल निर्माण करना भूल गई। पिछले 8 महीनों में यहां एक ईट तक नहीं रखी गई।
आंदोलनकारी छात्रों ने सुनाई अपनी यह तकलीफ
आंदोलनकारी छात्र शुभम चौधरी का कहना है कि उन्होंने न केवल जबलपुर के सांसद राकेश सिंह बल्कि विभागीय मंत्री मीना सिंह से भी अपनी फरियाद की लेकिन उनके नए हॉस्टल निर्माण की समस्या जस की तस बनी हुई है। शुभम चौधरी का कहना है कि जब उन्होंने निर्माण एजेंसी पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के अधिकारी से बात की तो उन्होंने साफ कह दिया कि हॉस्टल निर्माण के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं मिला है। शुभम चौधरी ने आरोप लगाया कि जर्जर हॉस्टल से छात्रों को बाहर निकालने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी लगातार दबाव बना रहे हैं लेकिन नए हॉस्टल के निर्माण की बात पर कोई ध्यान नहीं देते हैं।
इस मामले में V CAN न्यूज़ ने आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रभारी सहायक आयुक्त रीता पटेल से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन और अति पिछड़ा वर्ग उत्थान समिति ने अनूसूचित जाति-जनजाति छात्र संघ जबलपुर के इस आंदोलन का समर्थन कर छात्रों की मांग को उचित
बताया है।