सऊदी अरब ने रमजान से पहले कई नियम लागू कर दिए हैं। कई मुस्लिम देश सऊदी शासन के फैसलों की अलोचना कर रहे हैं। इन फैसलों से दुनियाभर में नई बहस छिड़ गई है।
मुंबई। न्यूज डेस्क । कट्टर इस्लाम देश सऊदी अरब ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाकर दुनियाभर में नई बहस को हवा दे दी है। उसके इस फैसले से दुनियाभर के मुस्लिम देश खासे नजर आ रहे हैं। कई देशों ने सऊदी शासन के इस फैसले को इस्लाम के खिलाफ बताया है। सऊदी अरब की सरकार ने ये सख्त नियम रमजान के महीने को मनाने के लिए लागू किए हैं। इन नए नियमों के तहत लाउडस्पीकर के साथ ही कई चीजों पर सख्त पाबंदी का ऐलान किया गया है। ज्यादातर मुस्लिम देश पूछ रहे हैं कि आखिर सऊदी को इस्लाम का प्रभाव कम करने वाले ये नियम लागू करने की क्या दरकरार पैदा हो गई ।
ऐसा भी नहीं है कि सभी देश या दुनियाभर के लोग सऊदी अरब के इस फैसले के खिलाफ हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इससे सऊदी अरब को इससे नई पहचान मिलेगी। वहीं, इस्लाम के जानकारों का यह भी कहना है कि नए नियमों से सऊदी अरब को नई पहचान तो मिल जाएगी, लेकिन इस्लाम किसी तरह के बदलाव की इजाजत नहीं देता है। उनका कहना है कि सऊदी के क्राउंन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के कई फैसले इस्लाम के अनुयायियों के जीने का तरीका बदलने वाले हैं। ये इस्लाम के मुताबिक बिलकुल ठीक नहीं है।
सऊदी ने किन चीजों पर लगा दी है पाबंदी
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि सऊदी अरब शासन ने लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध के साथ ही और कौन-कौन सी पाबंदियां लगाई हैं। नए नियमों के तहत सऊदी में अब कोई भी मस्जिदों को दान नहीं दे सकता है। वहीं, शाम ढलने के बाद मस्जिदों में इफ्तार पर भी रोक लगा दी गई है। अगर किसी मस्जिद में इबादत का समय लंबा रखा गया है तो उसकी निगरानी की जाएगी। इसके अलावा अब छोटे बच्चे मस्जिदों में नमाज अदा नहीं कर पाएंगे। मस्जिद में नमाज के लिए जाने वाले हर व्यक्ति को पहचान पत्र दिखाना होगा। मक्का और मदीना में मुख्य मस्जिदों के अलावा नमाज का प्रसार नहीं होगा। मस्जिदों में लगे कैमरों का इस्तेमाल नमाज के वक्त तस्वीरें लेने के लिए नहीं किया जाएगा। रोजा रखने वालों को खिलाने के लिए चंदा इकट्ठा नहीं किया जाएगा।