मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | सकट चौथ का व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष सकट संकष्टी शुक्रवार को मनाई जा रही है। देश में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग नामों संकष्टी चतुर्थी, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट चौथ, तिलकुट चतुर्थी, संकट चौथ, माघी चौथ, तिल चौथ आदि नामों से जाना जाता है।
सकट चौथ व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए दिनभर उपवास रखती है। मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से संतान के ऊपर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। सकट चौथ पर महिलाएं दिनभर व्रत रखती है और रात के समय भगवान गणेश की पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन करते हुए उन्हें जल अर्पित कर व्रत का पारण करती हैं।
सकट चौथ पर सौभाग्य योग बन रहा है, जो बहुत शुभ माना जाता है। इस योग में किया गया कोई भी कार्य और पूजा पूजा पाठ से सफलता प्राप्त होती है। सकट चौथ पर सौभाग्य योग दोपहर 3:06 बजे तक रहेगा और उसके बाद शोभन योग शुरू होगा।
सकट चौथ शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - सुबह 08:51 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - शनिवार को सुबह 09:14 बजे
सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय - रात्रि 09:05 बजे
सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले अभिजीत मुहूर्त भी 21 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेंगे। सकट चौथ के दिन सुबह से दोपहर 3.06 बजे तक सौभाग्य योग होता है। उसके बाद शोभन योग शुरू होगा जो शनिवार को दोपहर तक है।
संकष्टी चतुर्थी तिथि पर व्रत रखने के बाद चंद्रमा का दर्शन अवश्य किया जाता है। ऐसे में शुक्रवार की रात सकट चौथ पर चंद्रमा 9 बजकर 5 मिनट पर होगा। ऐसे में जो महिलाएं सकट चौथ का व्रत रखेंगी वे पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करते हुए जल अर्पित करें। हालांकि अलग-अलग जगहों पर चंद्रमा के निकलने का समय अलग हो सकता है।